मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
अक्सर लोग अतीत की यादों में खोए रहते हैं या भविष्य की चिंताओं में डूबे रहते हैं, लेकिन जीवन की सार्थकता इस बात में है कि हम इन दोनों के बीच के संतुलन को समझें। वास्तव में, अतीत वह पाठशाला है, जहाँ हम अनुभव की शिक्षा लेते हैं और वर्तमान वह कार्यशाला है, जहाँ हम उन शिक्षाओं को प्रयोग में लाकर अपने जीवन को गढ़ते हैं। अतीत केवल बीता हुआ समय नहीं है, बल्कि यह अनुभव का एक विशाल संग्रह है। जीवन में हमसे जो गलतियां हुईं, जो असफलताएं मिलीं और जो सफलताएं हमने अर्जित की, वे सभी हमें कुछ ना कुछ सिखाती हैं। हम अतीत को बदल नहीं सकते, लेकिन वर्तमान में सही कदम उठाकर एक बेहतर भविष्य की नींव जरूर रख सकते हैं।
अतीत और वर्तमान का संबंध बीज और वृक्ष की तरह है। अतीत के अनुभव वे बीज हैं, जिन्हें वर्तमान की मिट्टी में बोकर ही सफलता का फल प्राप्त किया जा सकता है। अंततः, जीवन एक सतत चलने वाली प्रक्रिया है। अतीत हमें ‘क्या करना चाहिए’ और ‘क्या नहीं करना चाहिए’ का बोध कराता है और वर्तमान हमें ‘करने’ का अवसर देता है। जो व्यक्ति अपने अतीत की कड़वाहट को पीछे छोड़कर उसकी सीख को अपने वर्तमान के कर्मों में ढ़ाल लेता है, वही वास्तव में उन्नति के मार्ग पर प्रशस्त होता है। इसलिए अतीत से सीखें, वर्तमान में जिएं और भविष्य की आशा करें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

