Sunday, April 19, 2026
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सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र में धारा 118 का उल्लंघन कर जाली हस्ताक्षर से जमीन हड़पने मामला |

जिला सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र में धारा 118 की अवहेलना कर जाली हस्ताक्षरों के आधार पर करोड़ों की कृषि भूमि हड़पने का गंभीर मामला – पीड़ित परिवार ने त्वरित कानूनी कार्रवाई की मांग

डॉ नीरज कुमार शिमला प्रभारी | जिला सिरमौर के राजगढ़ क्षेत्र में कृषि भूमि से जुड़े एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक मामले का खुलासा हुआ है। आरोप है कि बाहरी राज्य की निजी कंपनी एम/एस Wilderness Holiday Pvt. Ltd., दिल्ली द्वारा हिमाचल प्रदेश कास्तकारी एवं भूमि सुधार अधिनियम, 1972 की धारा 118 के प्रावधानों को दरकिनार करते हुए जाली दस्तावेज एवं फर्जी हस्ताक्षरों के माध्यम से करोड़ों रुपये मूल्य की कृषि भूमि को अवैध रूप से हथियाने का प्रयास किया गया है।
पीड़ित किसान खेम राम ने आरोप लगाया है कि उनकी लगभग 3 बीघा कृषि भूमि, जिसकी वास्तविक बाजार कीमत लगभग ₹1 करोड़ 24 लाख है, को कौड़ियों के भाव हड़पने की साजिश रची गई।
पीड़ित के अनुसार:
उनकी जानकारी एवं सहमति के बिना जाली हस्ताक्षर किए गए।
फर्जी दस्तावेज तैयार कर धारा 118 के तहत अनुमति प्राप्त करने का प्रयास किया गया।
पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग करते हुए भूमि को अवैध रूप से स्थानांतरित करने की कोशिश की गई।
कंपनी के कर्मचारियों द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं।
स्थानीय स्तर पर जल, जंगल, जमीन एवं सड़कों पर अवैध कब्जा किया गया है।
पीड़ित परिवार को गांव से बाहर करने का दबाव बनाया जा रहा है।
यह कृत्य न केवल एक किसान के अधिकारों का गंभीर हनन है, बल्कि हिमाचल प्रदेश के भूमि संरक्षण कानूनों की खुली अवहेलना भी है, जिनका उद्देश्य बाहरी व्यक्तियों द्वारा कृषि भूमि की खरीद पर रोक लगाना है।
इस संबंध में पीड़ित द्वारा माननीय मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री, मुख्य सचिव, राजस्व सचिव, उपायुक्त सिरमौर एवं पुलिस अधीक्षक सिरमौर को दिनांक 18–20 अप्रैल 2026 को लिखित शिकायतें भेजी जा चुकी हैं, परंतु अब तक कोई ठोस एवं त्वरित कार्रवाई नहीं की गई है।
मुख्य मांगें:
मामले की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जाली दस्तावेज तैयार करने वाले सभी आरोपियों के विरुद्ध सख्त आपराधिक कार्रवाई की जाए।
संबंधित कंपनी एवं व्यक्तियों को भूमि पर किसी भी प्रकार का कब्जा या हस्तांतरण करने से तत्काल रोका जाए।
पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा धमकी देने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।
यदि कोई राजस्व अधिकारी या अन्य व्यक्ति संलिप्त पाया जाए तो उसके विरुद्ध भी कठोर कार्रवाई की जाए।
यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के किसानों, जल-जंगल-ज़मीन और राज्य के कानूनों की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं की गई, तो ऐसे मामले भविष्य में और बढ़ सकते हैं।
अतः राज्य सरकार एवं प्रशासन से आग्रह है कि इस गंभीर प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए तत्काल कठोर एवं प्रभावी कदम उठाए जाएं।

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