Friday, April 17, 2026
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शांति, सद्भाव और मानवता का अद्भुत संगम: बालाघाट में निकली भव्य ‘अहिंसा रैली’, उमड़ा जनसैलाब

मूकनायक समाचार /सत्यशील गोंडाने
बालाघाट

बालाघाट शहर ने एक बार फिर सामाजिक एकता, आध्यात्मिक जागरूकता और मानवीय मूल्यों का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किया, जब महावीर जन्मकल्याणक महोत्सव समिति के तत्वावधान में भव्य ‘अहिंसा रैली’ का आयोजन किया गया। यह रैली केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि शांति, करुणा और भाईचारे का सशक्त संदेश लेकर पूरे शहर में प्रेरणा का वातावरण निर्मित करती चली गई।

रैली का उद्देश्य भगवान महावीर के अमर संदेश “जियो और जीने दो” को जन-जन तक पहुंचाना था। इस संदेश की प्रासंगिकता आज के दौर में और अधिक बढ़ जाती है, जब समाज हिंसा, असहिष्णुता और आपसी तनाव जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे समय में बालाघाट की सड़कों पर उतरा यह जनसैलाब न केवल एक आस्था का प्रतीक था, बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया।

मीडिया प्रभारी मोनिल जैन ने जानकारी देते हुए बताया कि रैली का शुभारंभ शाम 5 बजे शहर के प्रमुख स्थल हनुमान चौक से हुआ। जैसे ही रैली प्रारंभ हुई, वातावरण में श्रद्धा, उत्साह और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होने लगा। सफेद परिधानों में सजे महिलाएं, पुरुष, युवा और बच्चे हाथों में अहिंसा, प्रेम और सद्भाव के संदेश लिखी तख्तियां लिए अनुशासित ढंग से आगे बढ़ रहे थे। रैली का समापन भगवान महावीर अहिंसा द्वार, कालीपुतली में हुआ, जहां यह एक विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई।

रैली के दौरान “अहिंसा परमो धर्मः” और “जियो और जीने दो” जैसे उद्घोष पूरे शहर में गूंजते रहे। भजनों, जयघोषों और धार्मिक नारों ने वातावरण को पूर्णतः आध्यात्मिक बना दिया। रास्ते भर जगह-जगह नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा कर रैली का स्वागत किया गया, जिससे आयोजन की भव्यता और जनभागीदारी का उत्साह और अधिक बढ़ गया।

महोत्सव समिति के अध्यक्ष आदित्य सेठिया ने अपने उद्बोधन में कहा कि अहिंसा केवल एक धार्मिक सिद्धांत नहीं, बल्कि आज की वैश्विक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार विश्व में हिंसा और असहिष्णुता बढ़ रही है, ऐसे में भगवान महावीर के विचार मानवता के लिए मार्गदर्शक बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे इन आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें और समाज में सकारात्मक परिवर्तन के वाहक बनें।

इस आयोजन की सबसे विशेष बात रही सर्व समाज की सक्रिय भागीदारी। विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारी वर्ग, प्रबुद्ध नागरिकों और आमजन की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि अहिंसा और शांति का संदेश किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण है।

समापन स्थल पर आयोजित धर्मसभा में जैन समाज के वरिष्ठजनों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए अहिंसा के व्यापक स्वरूप पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि अहिंसा केवल शारीरिक हिंसा से दूर रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे विचार, वाणी और आचरण की शुद्धता का भी प्रतीक है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे क्रोध, द्वेष और नकारात्मक भावनाओं को त्यागकर प्रेम, सहिष्णुता और करुणा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।

कार्यक्रम के अंत में महोत्सव समिति के उपाध्यक्ष रोहित सुराणा ने सभी सहयोगियों, पुलिस प्रशासन और मीडिया कर्मियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस आयोजन की सफलता सामूहिक प्रयासों का परिणाम है और समाज के हर वर्ग के सहयोग से ही यह संभव हो पाया है।

इस अवसर पर समिति के पदाधिकारी एवं सदस्यगण बड़ी संख्या में उपस्थित रहे और आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

बालाघाट में आयोजित यह ‘अहिंसा रैली’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि एक संदेश बनकर उभरी—एक ऐसा संदेश जो समाज को जोड़ने, मानवता को सशक्त बनाने और आने वाली पीढ़ियों को सही दिशा देने की क्षमता रखता है।

आज जब दुनिया विभिन्न प्रकार के सामाजिक और मानसिक तनावों से जूझ रही है, ऐसे में इस प्रकार के आयोजन समाज को नई ऊर्जा और सकारात्मक सोच प्रदान करते हैं।

अंततः, यह कहा जा सकता है कि बालाघाट की यह अहिंसा रैली शांति, प्रेम और सद्भाव की उस मजबूत नींव को पुनः स्थापित करने का प्रयास है, जिस पर एक सशक्त, समृद्ध और मानवीय समाज का निर्माण संभव है।

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