मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
✍️✍️
अन्याय को सहना, उसे बढ़ावा देने के समान है। इतिहास गवाह है कि जब भी अन्याय अपनी सीमा लांघता है, तब किसी ना किसी साहसी व्यक्तित्व का उदय होता है। ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले, बाबासाहेब डॉ भीमराव अंबेडकर, गुरु रविदास व अन्य महापुरुषों ने रूढ़िवादी परंपराओं, अंधविश्वासों और भेदभाव से ग्रसित शिक्षा, कानून, महिलाओं के उत्थान और जनजागरूकता के माध्यम से संघर्ष किया, शोषण, अन्याय और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ पूरजोर आवाज उठाई । सच बोलने और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस ही वह कुंजी है, जो प्रगति के द्वार खोलती है।
आज के आधुनिक युग में भी हमें ऐसे ही साहस की आवश्यकता है और एकजुट होकर समाज को आगे बढ़ाने के लिए, अन्यायी प्रणालियों को चुनौती देना आवश्यक है। परिवर्तन केवल नारों से नहीं, बल्कि समाज की एकजुटता, व्यक्तिगत ईमानदारी और सामूहिक विरोध से आता है। यदि हम अपने आस-पास हो रहे गलत कार्यों के खिलाफ बोलने का साहस जुटा लें, तो एक न्यायपूर्ण और प्रगतिशील समाज का निर्माण निश्चित है। जैसा कि कहा गया है—”साहस वह गुण है, जो बाकी सभी गुणों को सुरक्षित रखता है।”
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

