Tuesday, September 29, 2026
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बामसेफ और भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन की अनुमति रद्द करने के विरोध में ज्ञापन, 22 जनवरी को देशव्यापी प्रदर्शन।

मूकनायक/एम एस गौतम/सिरोही/राजस्थान।

बामसेफ एवं भारत मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय सम्मेलन की पूर्व में दी गई अनुमति को रद्द किए जाने के विरोध में बहुजन संगठनों ने कड़ा आक्रोश व्यक्त किया है। संगठनों का आरोप है कि 26 से 30 दिसंबर के बीच ओडिशा के कटक में प्रस्तावित राष्ट्रीय सम्मेलन की अनुमति दो महीने पहले दी गई थी, जिसे बाद में निरस्त कर दिया गया। इसे संविधान के अनुच्छेद 19(1) के अंतर्गत प्राप्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभा, संगठन बनाने एवं प्रचार-प्रसार के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।संगठनों का कहना है कि एससी, एसटी, ओबीसी एवं धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों—जिनमें सिख, ईसाई, बौद्ध, मुस्लिम, लिंगायत सहित अन्य मूलनिवासी समाज शामिल हैं—के सामाजिक व संवैधानिक अधिकारों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। भारत मुक्ति मोर्चा को बहुजन समाज के अधिकारों की आवाज़ उठाने वाला प्रमुख संगठन बताते हुए वक्ताओं ने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर चुनौती करार दिया।इस मुद्दे को लेकर “संविधान बचाओ, लोकतंत्र बचाओ आंदोलन” के तहत 22 जनवरी को देशभर के लगभग 700 जिला मुख्यालयों पर रैली और विरोध प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। इसी क्रम में सिरोही जिला मुख्यालय पर अंबेडकर सर्कल से जिला कलेक्टर कार्यालय तक रैली निकालकर ज्ञापन सौंपा जाएगा।इस दौरान आयोजकों एड. सुंदरलाल मौसलपुरिया(बहुजन क्रांति मोर्चा),डॉ. आसुराम लुनिया(भारत मुक्ति मोर्चा), एड. दशरथ सिंह आढ़ा( राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा)मोहनलाल मीणा( राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद),व राजेंद्र सिंह परमार( क्षत्रिय मूलनिवासी महासंघ) ने समस्त एससी, एसटी, ओबीसी, धार्मिक अल्पसंख्यक एवं क्षत्रिय मूलनिवासी समाज से अधिक संख्या में भाग लेकर आंदोलन को सफल बनाने की अपील की है।

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