Tuesday, September 29, 2026
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दुर्ग में महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन धरने स्थल पर धम्मचक्क पवत्तन पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया

मूकनायक/कमलेश लवहात्रै
बिलासपुर छत्तीसगढ़

ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम, छत्तीसगढ़ और दुर्ग/भिलाई के समस्त बौद्ध संगठन बिहार के बोधगया महाबोधी महाविहार से बीटी 1949 एक्ट निरस्त कराने और महाबोधी महाविहार को ब्राह्मणवाद से मुक्त करने के लिए देश के अलग अलग राज्यों में आंदोलन चल रहे है । दुर्ग जिले में ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ प्रदेश अध्यक्ष सविता बौद्ध संकल्पी अर्थात सामनेरी खेमा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में एवं समता सुरक्षा सेना के संरक्षण में निरंतर जारी रहेगा। सामनेरी खेमा ने धम्मचक्क प्रवतन पर्व पर परित देसना की।सामनेरी विशाखा ,सामनेरी संघप्रिया भिक्षुणी संघ और सैकड़ों की संख्या में लोगों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।ऑल इंडिया बुद्धिष्ट फोरम छत्तीसगढ़ और दुर्ग/भिलाई आंदोलन के नेतृत्वकर्ता, तन-मन-धन से जमीनी स्तर पर कार्य करने और श्रमदान करने वाले डॉ .अरविंद चौधरी,अनिल जोग,रामाराव ढोक,सुदेश कुमार,आशीष चौहान,महेंद्र बौद्ध,अल्का बौद्ध,जयश्री बौद्ध,करुणा भालाधरे,अर्चना वासनिक,रसिया सहारे,नीलिमा कांहेकर,काशी मेश्राम,महेंद्र चौहान,माधुरी रंगारी ,आदि सुबह से शाम तक धरने स्थल पर अपनी सेवाएं दे रहें है।आपका समर्पण और कड़ी मेहनत अवश्य ही रंग लाएगी और बीटी एक्ट 1949 रद्द होकर रहेगा। धरने स्थल पर उनके संबोधन से और भी बल मिला तथा सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ । आंदोलन के पहले दिन से आयुष्मान डॉ.अरविंद चौधरी और सुदेश कुमार पहले दिन से बोधगया महाबोधी महाविहार मुक्ति आंदोलन की वर्तमान वस्तुस्थिति पर अपने जोशीले वक्तव्य से लोगों को जागृत कर रहे है। हमारी केवल दो ही मांगे पहली बीटी एक्ट 1949 रद्द हो और महाबोधि महाविहार गैर बौद्धों से मुक्त होना चाहिए । अन्यथा यह आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक बिहार सरकार बीटी एक्ट 1949 खत्म नहीं कर देती और महाबोधी महाविहार प्रबंधन बौद्धों को सौंप नहीं देती।हमारी लड़ाई जायज है। बिहार सरकार की मनमानी अब नहीं चलेगी। भारत में प्रियदर्शी सम्राट अशोक के अनेक बौद्ध स्थलों को मनुवादियों ने अतिक्रमण और हड़प करके रखा है। अब हम चुप नहीं रहेंगे।अपना धम्म स्थल लेकर रहेंगे। यदि फैसला हमारे पक्ष में नहीं आया तो हम आंदोलन अनिश्चित कालीन करेंगे कहते हुए मजबूती से अपनी बात रखी।
इस अवसर पर साक्षी बौद्ध,श्रेया,रिया ,,मंजू डोंगरे,प्रमिला रंगारी,योगेश सहारे,किशोर वाल्दे ,योगा डोंगरे,लतिका खांडेकर ,खुशबू बौद्ध,अष्टशिला वासनिक, बेनू गजभिए,राजू गेडाम भूषण नाडिया,ज्योति गेडाम, एस.आर.कांडे, प्रज्ञा कांडे , लाला रंगारी,कुमेश खांडेकर, जे . डी.राउत ,घनश्याम लांजेवार ,भूमिका,नेहा,द्वारिका रामटेके,ज्योति भीमटे,पूर्णिमा मेश्राम,सुनीता भीमटे,गौतमा गेडाम,पूर्णिमा टेंभेकर,प्रमिला वाहने,गीता शेंडे ,शर्मिला घोड़ेसवार,वेदना मेश्राम,राजेंद्र मेश्राम,गीता वैद्य,अविनाश अड़कने,संगीता अड़कने ऊषा गावंडे,सुषमा वैद्य दीपक घोड़ेसवार ,भाग्यशाली,मीरा , नलिनी मेश्राम,छत्रपति वासनिक, डॉ सरोज,भूपत बोरकर, सचिता चौरे,लुंबिनी,प्रतिमा,महानंदा,सुनंदा, डॉ वेदिता जोग, वान्या जोग,आरव ,पूनम अजय शेंडे,आयशा,ने गरिमामई उपस्थिति दर्ज कराई। बौद्ध पर्व आषाढी पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के सु अवसर पर धरने स्थल पर गृहस्थों द्वारा सार्वजनिक खीर पूड़ी दान किया गया। रामाराव ढोक ,इंदु ढोक और संघमित्रा भीमराव कठाणे ने धरना प्रदर्शन में जलपान की सेवाएं संभाली है। प्रेरणा ने उपस्थित आंदोलनकारियों को फलदान किया । प्रतीक्षा सहारे,सृष्टि,सहारे
रिया,श्रेया,श्रेयस ,अक्षिता, आयशा और प्रज्ञा बच्चों ने नारों के माध्यम से बिहार सरकार से मांग की गई।

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