मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जिस इंसान ने विकट परिस्थितियों में अपनों को बदलते देखा है, वो जिंदगी में हर परिस्थिति का सामना कर सकता है। या ऐसे भी कह सकते हैं। सारी बातें हंस कर टाल देने वाले लोग, पहले उन बातों को रो कर समझ चुके होते हैं!
वर्तमान समय का ऐसा प्रभाव है कि जुते शोरूम में और किताबें फुटपाथ पर, शराब दुकानों पर और दूध गली गली में, कुत्ते महलों में और माँ बाप वृद्धाश्रम में होते हैं। एक शायर की दो लाइन याद आती है:- ना दिन से रिश्ता है, ना रात से रिश्ता है । हर शख्स का इस दुनिया में हालात से रिश्ता है। याद रखना एक दिन कहानी बन कर रह जाएंगे हम ! इसलिए कोशिश करें कि जीवनशैली की कहानी “अच्छी” हो ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

