Tuesday, September 29, 2026
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सत्य की जीत: भगवान सिंह लाबराऊ ने पुलिस की झूठी साजिश का किया पर्दाफाश

मूकनायक /राजस्थान

✍️जोधपुर संभाग प्रभारी:- रूपाराम मेघवाल

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बाड़मेर।
भगवानसिंह लाबराऊ, जो कि एक प्रतिष्ठित आरटीआई एक्टिविस्ट और आम आदमी पार्टी, बाड़मेर के जिलाध्यक्ष हैं, ने पुलिस की फर्जी दस्तावेज़ों और झूठे आरोपों के आधार पर की गई कार्रवाई का पर्दाफाश कर न्याय और सत्य की जीत सुनिश्चित की है।

मामले की शुरुआत: झूठे आरोप और फर्जी दस्तावेज़

पुलिस ने भगवानसिंह लाबराऊ के खिलाफ धारा 107 और 116(3) सीआरपीसी के तहत न्यायालय में झूठे आरोप लगाते हुए इस्तगासा पेश किया।
उन्होंने दावा किया कि जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बाड़मेर से उन्हें भगवानसिंह के खिलाफ कार्यवाही का आदेश प्राप्त हुआ है।
इसके लिए पत्र क्रमांक 638 दिनांक 14 जून 2024 को आधार बनाया गया।

आरटीआई से हुआ खुलासा

भगवानसिंह लाबराऊ ने पुलिस थाना रामसर से सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत यह पूछा कि क्या जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश दिया था।
जवाब: पुलिस ने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आदेश कभी जारी नहीं हुआ।
यह खुलासा करते ही यह स्पष्ट हो गया कि पुलिस ने न्यायालय में फर्जी दस्तावेज पेश किए थे।

पुलिस का बचाव और झूठ का पर्दाफाश

जब पुलिस को आरटीआई के जवाब में झूठा साबित किया गया, तो उन्होंने न्यायालय में यह तर्क दिया कि एएसपी जस्साराम बॉस ने भगवानसिंह के खिलाफ कार्यवाही का आदेश दिया।
भगवानसिंह ने पुन: आरटीआई लगाई और इस दावे की जांच की।
दूसरी आरटीआई का जवाब: जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय, बाड़मेर ने स्पष्ट किया कि एएसपी जस्साराम बॉस द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं हुआ।
पुलिस का यह दावा भी झूठा साबित हुआ।

भगवानसिंह ने कोर्ट में दायर किया प्रार्थना-पत्र

भगवानसिंह लाबराऊ ने पुलिस के खिलाफ धारा 379 सहपठित धारा 215 बीएनएसएस के तहत न्यायालय में प्रार्थना-पत्र दायर किया।
प्रार्थना में मांग:

  1. पुलिस द्वारा फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने की जांच की जाए।
  2. दोषी अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
  3. उनके खिलाफ झूठी कार्यवाहियों को समाप्त किया जाए।

न्याय और सत्य की जीत

भगवानसिंह लाबराऊ ने कहा, “यह लड़ाई केवल मेरी नहीं है। यह हर उस व्यक्ति की है, जो अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना चाहता है। मैंने आरटीआई का उपयोग करके साबित किया कि झूठे दस्तावेज़ और फर्जी कार्यवाही सत्य के सामने टिक नहीं सकती।”
उन्होंने आगे कहा, “दिया और तूफान की लड़ाई में, हमेशा दिया ही जलता है।”

भगवानसिंह लाबराऊ की अपील

भगवानसिंह ने कहा, “हर नागरिक को अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। सूचना का अधिकार (RTI) एक सशक्त माध्यम है, जिसका सही उपयोग भ्रष्टाचार और अन्याय को उजागर कर सकता है।”
उन्होंने सभी से न्याय और सत्य के समर्थन में आगे आने की अपील की।


घटनाक्रम का सारांश:

  1. 14 जून 2024: पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर भगवानसिंह के खिलाफ कार्यवाही शुरू की।
  2. 20 जून 2024: भगवानसिंह ने पहली आरटीआई दायर कर पुलिस के दावे की सच्चाई जाननी चाही।
  3. जुलाई 2024: आरटीआई के जवाब में स्पष्ट हुआ कि पुलिस द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज फर्जी थे।
  4. अगस्त 2024: भगवानसिंह ने न्यायालय में पुलिस के खिलाफ प्रार्थना-पत्र दायर किया।
  5. नवंबर 2024: पुलिस ने अपने बचाव में फिर झूठे दावे किए, जिसे भगवानसिंह ने दूसरी आरटीआई से खारिज कर दिया।
  6. दिसंबर 2024: जिला पुलिस अधीक्षक कार्यालय ने अंतिम आरटीआई में पुलिस के सभी दावों को झूठा और फर्जी करार दिया।

“सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।”
भगवानसिंह लाबराऊ की यह लड़ाई एक उदाहरण है कि कैसे नागरिक जागरूकता और कानूनी प्रक्रिया का उपयोग करके झूठ और अन्याय को हराया जा सकता है।

(यह खबर हर नागरिक को प्रेरणा देती है कि वे अपने अधिकारों के प्रति सजग रहें और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं।)

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