मूकनायक) देश
“राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा”
👉 उस समय बाबा साहब डॉ आंबेडकर गरीबों का आशास्थान, चहेतों का निधान और कार्यकर्ताओं का आश्रयस्थान बन गये थे। एक दिन घर के लोग दूसरे गाँव गये थे, तब बाहरी गाँव से दो व्यक्ति उनके यहाँ सलाह-मशविरे के लिए आये। न्यायालय में काम-धंधे के लिए जाने से पहले उन दोनों व्यक्तियों के साथ बाबा साहब डॉ आंबेडकर ने नाश्ता किया। वे रसोई-कला में निपुण थे। शाम को जल्दी घर लौट कर उन्होंने उन व्यक्तियों के लिए अपने हाथों रसोई बनाकर रख दी। रात में भोजन करते समय यह बात जब उन अथितियों के ध्यान में आयी, तो उनकी आँखे कृतज्ञता से भर आई। यह देखकर वे गरीब धन्य हुए कि ऐसा श्रेष्ठ व्यक्ति जो मितभाषी है, जिसका स्वभाव एक रहस्य है, जिसका व्यक्तित्व प्रभावी और परिणामकारी है, वह गरीबों के लिए इतने शरीरिक कष्ट उठा रहा है। उन्हें वे अनाथों के नाथ लगते थे। उनका नेतृत्व उन्हें परमात्मा का वरदान ही लगता था। नेतृत्व ही नहीं, अपितु साम्राज्य भी पराक्रमि नेताओं की आकर्षक उदारता पर संस्थापित हुए है। जनकल्याण की निर्मल, अखंड, निरन्तर तन्मयता और परिस्थिति का आकलन, तुरन्त निर्णय लेने की क्षमता, विचार प्रस्तुत और कार्यान्वित करने में आवश्यक निर्भीकता – इन गुणों के अतिरिक्त महान नेता के पास और एक गुण होना मुख्यतः जरूरी है और वह गुण है संघटन के घटकों की ओर सहानुभूति और आत्मीयता से देखने वाला उसका दिल। ऐसे नेता के एक शब्द के लिए भी असंख्य लोग संकट में कूदने में आगे-पीछे नहीं देखते। इसका रहस्य इसीमें है। जो नेता इस मनुष्यत्व के गुणों का संवर्धन करते है, उनका ही नेतृत्व टिक पाता है। जिसकी सहृदयता प्रतिहत होती है, उसका नेतृत्व अल्प समय में ही विनष्ट हो जाता है।
जीवन-चरित (63-64
लेखक:🅰️🅿️ सिंह, दिल्ली
जय भीम जय भारत जय संविधान

