मूकनायक
देश
राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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हमारा जीवन दूसरों से ज्यादा स्वयं की दृष्टि में श्रेष्ठ एवं पवित्र होना चाहिए । केवल किसी के बुरे कहने मात्र से हमारा जीवन बुरा नहीं बन जाता है। किसी से बदला लेने का नहीं अपितु स्वयं को बदल डालने का विचार ज्यादा श्रेष्ठ है। बदले की आग मशाल की तरह दूसरों से पहले स्वयं को ही जलाती है।
सहनशीलता के शीतल जल से जितना शीघ्र हो सके, इस बदले की आग को रोकना ही बुद्धिमत्ता है। बदले की भावना हमारे समय को ही नष्ट नहीं करती अपितु हमारे स्वास्थ्य और जीवन तक को नष्ट कर जाती है। दुनिया को बदल पाना बड़ा मुश्किल है । इसलिए स्वयं को बदलने में ही अपनी ऊर्जा को लगाना सुखी एवं आनंदमय जीवन का एक मात्र उपाय है ।
लेखक
बिरदी चंद गोठवाल, नारनौल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

