मूकनायक
देश
ओमप्रकाश वर्मा
[देवानांप्रिय अशोक]
सम्राट अशोक सर्वश्रेष्ठ है।
सम्राट अशोक मानवतावादी है।
सम्राट अशोक दयालु है।
अशोक ने धम्मलिपि पत्थरों पर खुदवाकर बुद्ध के धम्म का प्रचार-प्रसार किया वह विश्व के इतिहास में अजोड है।
सम्राट ने अपने पुत्र महेंद्र और पुत्री संघमित्रा को धम्म प्रचार के लिए प्रव्रजित होकर भिक्खु व भिक्खुणी होने के लिए प्रेरित किए और श्रीलंका भेजे। सही में अशोक धम्म दायद हुआ।
धम्म प्रचार-प्रसार के लिए अशोक ने कहा-
“एताये मे अठाये इयं धंमलिपि लिखापिता हेवं अनुपटिपजंतु चिलंथितिका च हेतू ती ति। ” अर्थात- मेरे इस प्रयोजन के लिए यह धम्मलिपि लिखवायी गयी है कि ( लोग ) इसके अनुसार आचरण करें और यह चिरस्थायी हो।
देवानांप्रिय राजा कहते है-
“धंमे साधू कियं चु धंमे ति ।”
- धम्म श्रेष्ठ है, परन्तु धम्म क्या है?
” अपासिनवे बहु कयाने दया दाने सचे सोचये। “
- पाप कर्मो से दूर रहना, खूब सत्कर्म करना, दया,दान, सत्य (और ) शुचिता ( पवित्रता)।
- Ref: स्तंभ देहली-टोपरा: द्वितीय अभिलेख
- 12.10.2024
- लेखक :रवि शेखर बौद्ध

