

75.92 लाख रुपये की राशि पर बनी सहमति, प्री-लिटिगेशन के 84 प्रकरण भी निपटे
मूकनायक समाचार — संवाददाता सत्यशील गोंडाने, बालाघाट (मध्यप्रदेश)
वारासिवनी। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जबलपुर के निर्देशानुसार एवं प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालाघाट प्राणेश कुमार प्राण के निर्देशन में शनिवार 12 सितंबर 2026 को व्यवहार न्यायालय वारासिवनी में वर्ष 2026 की तृतीय नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया। लोक अदालत में आपसी सहमति एवं राजीनामे के माध्यम से 131 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इन प्रकरणों में कुल 75 लाख 92 हजार 315 रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी।
तहसील विधिक सेवा समिति वारासिवनी के प्रभारी अधिकारी एवं द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजयराज ठाकुर के नेतृत्व में आयोजित लोक अदालत का शुभारंभ सुबह 10:30 बजे मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन एवं पुष्प अर्पण के साथ हुआ। इस अवसर पर न्यायाधीशगण, विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी तथा पक्षकार उपस्थित रहे।
सात खंडपीठों में हुआ मामलों का निराकरण
नेशनल लोक अदालत के लिए व्यवहार न्यायालय वारासिवनी में कुल सात खंडपीठों का गठन किया गया था। खंडपीठ क्रमांक 19 में द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संजयराज ठाकुर की अध्यक्षता में मोटर दुर्घटना दावा एवं क्षतिपूर्ति के चार मामलों में 22 लाख 75 हजार रुपये के अवार्ड पारित किए गए। इसके अलावा आपराधिक अपील, सिविल अपील, सिविल एमजेसी एवं सिविल निष्पादनवाद सहित कुल 9 प्रकरणों का निराकरण करते हुए 25 लाख 67 हजार 475 रुपये के अवार्ड पारित किए गए।
खंडपीठ क्रमांक 20 में प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कमलेश मीणा की अध्यक्षता में मोटर दुर्घटना दावा के एक मामले में 1 लाख 50 हजार रुपये, विद्युत विवादों के 16 मामलों में 2 लाख 67 हजार 303 रुपये तथा क्लेम निष्पादनवाद के एक मामले में 19 लाख 23 हजार 597 रुपये की राशि का निराकरण किया गया। हिंदू विवाह के दो एवं एमजेसी गार्जियन वार्ड्स एक्ट के एक मामले सहित कुल 21 प्रकरणों का निराकरण हुआ।
खंडपीठ क्रमांक 21 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी दिव्या सिंह की अध्यक्षता में कुल 13 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें परक्राम्य लिखत अधिनियम के दो मामलों में 2 लाख 65 हजार रुपये तथा अन्य सिविल प्रकृति के एक मामले में 10 लाख 14 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई।
खंडपीठ क्रमांक 22 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ऋषभ डॉनल सिंह की अध्यक्षता में आपराधिक एवं शमनीय प्रकृति के चार, परक्राम्य लिखत अधिनियम का एक तथा एमजेसीआर का एक मामला मिलाकर कुल 6 प्रकरणों का निराकरण किया गया।
खंडपीठ क्रमांक 23 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी अंकिता जैन की अध्यक्षता में आपराधिक एवं शमनीय प्रकृति के सात, अन्य सिविल प्रकृति के दो तथा धारा 125 से संबंधित एक प्रकरण सहित कुल 10 मामलों का निराकरण हुआ।
खंडपीठ क्रमांक 24 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नेहा बाथरी की अध्यक्षता में आपराधिक एवं शमनीय प्रकृति के छह, परक्राम्य लिखत अधिनियम के दो, धारा 125 के 22 तथा घरेलू हिंसा के 13 मामलों सहित कुल 43 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इस दौरान 2 लाख 30 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई।
खंडपीठ क्रमांक 25 में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी नयन जैन की अध्यक्षता में आपराधिक एवं शमनीय प्रकृति के 26 तथा परक्राम्य लिखत अधिनियम के तीन मामलों सहित कुल 29 प्रकरणों का निराकरण किया गया। इनमें तीन मामलों में 7 लाख 45 हजार रुपये की समझौता राशि प्राप्त हुई।
प्री-लिटिगेशन के 84 मामलों का भी समाधान
लोक अदालत में न्यायालयों में लंबित मामलों के साथ प्री-लिटिगेशन प्रकरणों को भी आपसी समझौते के माध्यम से निपटाया गया। बैंक ऋण से जुड़े 5 मामलों में 3 लाख 21 हजार 500 रुपये, विद्युत अधिनियम के 46 मामलों में 8 लाख 74 हजार 15 रुपये तथा नगरपालिका से संबंधित 33 मामलों में 3 लाख 69 हजार 116 रुपये की समझौता राशि प्राप्त हुई। इस प्रकार कुल 84 प्री-लिटिगेशन प्रकरणों का निराकरण किया गया।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने निभाई सुलहकर्ता की भूमिका
लोक अदालत में विभिन्न खंडपीठों में सुलहकर्ता के रूप में सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। खंडपीठ क्रमांक 19 में ललित पारधी, 20 में चिरौंजी पारधी, 21 में श्रीमती मेघा बिसेन, 22 में अशोक बिसेन, 23 में भेजेंद्र चौधरी, 24 में रमणीक लाल ठाकरे तथा 25 में मनौती गढ़ेकर ने सुलह प्रक्रिया में सहयोग किया।
लोक अदालत को सफल बनाने में न्यायालयीन कर्मचारी, पुलिस विभाग, मध्यप्रदेश विद्युत मंडल, नगरपालिका, विभिन्न बैंकों के अधिकारी-कर्मचारी तथा तहसील विधिक सेवा समिति वारासिवनी के कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
समय और धन की बचत के साथ त्वरित समाधान
नेशनल लोक अदालत के माध्यम से पक्षकारों को आपसी सहमति एवं राजीनामे के आधार पर विवादों का त्वरित समाधान कराने का अवसर मिला। समझौते के माध्यम से मामलों के निराकरण से पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलने के साथ ही समय और धन की बचत का लाभ भी मिला। वारासिवनी में सात खंडपीठों के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का समाधान लोक अदालत की प्रभावशीलता और आपसी सहमति से विवाद निपटाने की उपयोगिता को दर्शाता है।

