
किसानों ने भरी हुंकार—3100 रुपए धान की मांग को लेकर 25 सितंबर को तहसील कार्यालय घेरेंगे
मूकनायक समाचार — संवाददाता सत्यशील गोंडाने, बालाघाट (मध्यप्रदेश)
खैरलांजी। किसान गर्जना संगठन के नए ब्लॉक कार्यालय का मंगलवार को ‘जय बलराम, जय किसान’ के उद्घोष के साथ भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में किसान एवं संगठन के पदाधिकारी मौजूद रहे। कार्यक्रम के दौरान किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई और उनके हितों को लेकर आगामी आंदोलन की रणनीति तय की गई।

बैठक में भावांतर योजना, धान का ₹3100 प्रति क्विंटल भाव, खाद की उपलब्धता, बिजली कटौती तथा धान की फसल में बीमारी एवं कीट प्रकोप जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। किसानों ने कहा कि खेती की लागत लगातार बढ़ रही है, जबकि फसल का उचित और लाभकारी मूल्य नहीं मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है।
25 सितंबर को तहसील कार्यालय घेरेंगे किसान
किसान गर्जना संगठन ने भावांतर योजना के विरोध और किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर 25 सितंबर 2026 को तहसील कार्यालय घेराव का ऐलान किया है। इस दौरान किसान मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों को शासन-प्रशासन के समक्ष मजबूती से रखेंगे। संगठन ने किसानों से बड़ी संख्या में आंदोलन में शामिल होने का आह्वान किया है।
₹3100 धान की मांग पर किसानों की हुंकार
किसानों ने धान का भाव ₹3100 प्रति क्विंटल किए जाने की मांग उठाई। किसानों का कहना है कि बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, डीजल और सिंचाई सहित खेती की लागत लगातार बढ़ रही है। ऐसे में उपज का उचित एवं लाभकारी मूल्य मिलना बेहद जरूरी है। किसानों ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनकी मेहनत और लागत के अनुरूप फसल का सम्मानजनक मूल्य सुनिश्चित होना चाहिए।
खेती की बढ़ती लागत ने बढ़ाई चिंता
बैठक में किसानों ने अपनी जमीनी समस्याएं रखते हुए कहा कि महंगे बीज, खाद, दवाइयां, मजदूरी, डीजल और सिंचाई के कारण खेती का खर्च लगातार बढ़ रहा है। इसके बावजूद फसल का उचित मूल्य नहीं मिलने से खेती की आर्थिक गणित किसानों के पक्ष में नहीं बैठ रही है। किसानों का कहना था कि यदि लागत बढ़ रही है तो फसल का दाम भी उसी अनुपात में बढ़ना चाहिए।
धान की बीमारी और कीट प्रकोप का मुद्दा भी उठा
क्षेत्र में धान की फसल में बीमारी एवं कीट प्रकोप को लेकर किसानों ने चिंता व्यक्त की। किसानों ने बताया कि फसल को बचाने के लिए महंगी दवाइयों और कीटनाशकों का उपयोग करना पड़ रहा है, जिससे लागत और बढ़ रही है। किसानों ने कृषि विभाग से समय पर तकनीकी सलाह, फसल सुरक्षा संबंधी मार्गदर्शन और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग की।
खाद और बिजली की समस्या पर भी चर्चा
किसानों ने खाद की उपलब्धता एवं कीमत तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। किसानों का कहना था कि खेती के महत्वपूर्ण समय में बिजली की अनियमित आपूर्ति से सिंचाई प्रभावित होती है। संगठन ने इन समस्याओं को किसान हित से जोड़ते हुए आगामी आंदोलन में प्रमुखता से उठाने का निर्णय लिया।
किसानों की आवाज का मंच बनेगा नया कार्यालय
किसान गर्जना संगठन के पदाधिकारियों ने बताया कि खैरलांजी में स्थापित नया ब्लॉक कार्यालय किसानों की समस्याओं को सुनने, उन्हें संबंधित विभागों एवं शासन तक पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर सामूहिक रूप से किसान हित में आंदोलन खड़ा करने का केंद्र बनेगा।
कार्यक्रम में संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अरविंद चौधरी, प्रदेश उपाध्यक्ष धुरन नगपुरे, जिला अध्यक्ष रामकुमार नागपुरे एवं जिला पंचायत सदस्य प्रकाश उके सहित संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ब्लॉक कार्यकारिणी एवं बड़ी संख्या में किसान रहे मौजूद
कार्यक्रम में ब्लॉक अध्यक्ष अशोक लिल्हारे, ब्लॉक प्रभारी डेविड सेलोकर, ब्लॉक उपाध्यक्ष बंडुभाऊ गोपाले, ब्लॉक सचिव जितलाल बसिने, ब्लॉक कार्यवाहक अध्यक्ष सुरेंद्र दमाहे, ब्लॉक उपाध्यक्ष अजब सिंह कृरपगये, गुड्डू भगत, ब्लॉक महासचिव राजेंद्र नगपुरे, भारत शिवहरे सहित ब्लॉक कार्यकारिणी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
25 सितंबर के आंदोलन पर टिकी नजरें
किसान गर्जना के नए कार्यालय के लोकार्पण के साथ ही खैरलांजी क्षेत्र के किसानों ने अपनी मांगों को लेकर संघर्ष की दिशा तय कर दी है। भावांतर योजना के विरोध, ₹3100 प्रति क्विंटल धान की मांग, खाद एवं बिजली की समस्या तथा फसल बीमारी जैसे मुद्दों को लेकर 25 सितंबर को प्रस्तावित तहसील कार्यालय घेराव अब क्षेत्र में किसान हितों से जुड़े महत्वपूर्ण आंदोलन के रूप में देखा जा रहा है।

