मुकदमों की लंबी लड़ाई से मिलेगी राहत — समझौते से प्रकरणों का निराकरण, कई मामलों में नियमानुसार छूट का भी लाभ
मूकनायक समाचार —/ सत्यशील गोंडाने —/ बालाघाट (मध्यप्रदेश)
वारासिवनी। न्यायालयों में वर्षों से लंबित मामलों और आपसी विवादों के समाधान के लिए 12 सितंबर 2026, शनिवार को व्यवहार न्यायालय वारासिवनी में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार आयोजित होने वाली इस लोक अदालत में वारासिवनी के लिए 7 खंडपीठों का गठन किया गया है। लोक अदालत का आयोजन प्रातः 10:30 बजे से होगा।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बालाघाट प्रणेश कुमार प्राण के मार्गदर्शन में जिला न्यायालय एवं अधीनस्थ तहसील न्यायालयों में नेशनल लोक अदालत के सफल आयोजन के लिए कुल 25 खंडपीठों का गठन किया गया है।
मुकदमेबाजी छोड़िए, समझौते से विवाद खत्म करने का अवसर
नेशनल लोक अदालत में ऐसे मामलों का निराकरण आपसी सहमति और राजीनामे के आधार पर किया जाएगा, जिनमें कानूनी रूप से समझौते की गुंजाइश है। इनमें न्यायालय में लंबित आपराधिक शमनीय प्रकरण, चेक बाउंस मामले, बैंक रिकवरी प्रकरण, मोटर दुर्घटना क्षतिपूर्ति दावा, वैवाहिक विवाद, श्रम प्रकरण, भूमि अधिग्रहण संबंधी मामले, विद्युत एवं जलकर, संपत्तिकर, दीवानी एवं राजस्व मामले सहित विभिन्न प्रीलिटिगेशन प्रकरण शामिल हैं।
लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां विवाद का समाधान पक्षकारों की आपसी सहमति से कराया जाता है। इससे मुकदमे को लंबे समय तक खींचने के बजाय दोनों पक्ष समझौते के माध्यम से विवाद समाप्त कर सकते हैं।
एकमुश्त भुगतान पर आर्थिक राहत का भी रास्ता
नगरपालिका एवं नगर पंचायतों से संबंधित मामलों में आपसी राजीनामे के आधार पर एकमुश्त राशि जमा करने पर नियमानुसार अधिभार में छूट का लाभ मिल सकता है। इसी प्रकार विद्युत विभाग से संबंधित प्रकरणों में भी एकमुश्त भुगतान की स्थिति में अधिभार राशि पर नियमानुसार छूट का प्रावधान है।
इस प्रकार लोक अदालत केवल विवाद समाप्त करने का माध्यम ही नहीं, बल्कि पात्र मामलों में पक्षकारों को आर्थिक राहत प्राप्त करने का अवसर भी प्रदान करती है।
लोक अदालत में न हार, न जीत — विवाद का होगा अंत
लोक अदालत की प्रक्रिया का उद्देश्य किसी एक पक्ष को विजेता और दूसरे को पराजित करना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों की सहमति से विवाद का समाधान कराना है। समझौते के बाद पक्षकारों को वर्षों तक चलने वाली न्यायिक प्रक्रिया, समय, धन और श्रम की बचत हो सकती है।
इसके साथ ही मुकदमेबाजी से उत्पन्न मानसिक तनाव से भी राहत मिलती है तथा परिवारों और समाज में आपसी भाईचारा एवं सौहार्द कायम रखने में मदद मिलती है।
पक्षकारों से लोक अदालत का लाभ उठाने की अपील
तहसील न्यायाधीश एवं अध्यक्ष, तहसील विधिक सेवा समिति, व्यवहार न्यायालय वारासिवनी माननीय संजय राज ठाकुर ने आमजन एवं संबंधित पक्षकारों से अपील की है कि यदि उनका कोई राजीनामा योग्य प्रकरण न्यायालय में लंबित है अथवा कोई विवाद अभी न्यायालय में नहीं पहुंचा है और उसमें आपसी समझौते की संभावना है, तो वे लोक अदालत के माध्यम से उसका निराकरण कराने के लिए आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें।
इच्छुक पक्षकार अपने अधिवक्ता के माध्यम से आवश्यक प्रक्रिया पूर्ण कर 12 सितंबर 2026 को व्यवहार न्यायालय वारासिवनी अथवा जिला न्यायालय में उपस्थित होकर इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं।
लंबी मुकदमेबाजी से राहत, न्यायालयों का भी घटेगा बोझ
लोक अदालत के माध्यम से आपसी सहमति से विवादों का समाधान होने पर पक्षकारों को लंबी न्यायिक प्रक्रिया से राहत मिलती है। साथ ही न्यायालयों में लंबित प्रकरणों की संख्या कम करने में भी सहायता मिलती है।
ऐसे पक्षकार जिनके मामलों में समझौते की संभावना है, उनके लिए नेशनल लोक अदालत विवाद को आगे बढ़ाने के बजाय आपसी सहमति से समाप्त करने का महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है।
जानकारी के लिए 15100 टोल-फ्री नंबर
लोक अदालत एवं निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित जानकारी के लिए जिला स्तर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा तहसील स्तर पर तहसील विधिक सेवा समिति के कार्यालय से कार्यालयीन समय में संपर्क किया जा सकता है।
इसके अलावा मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के टोल-फ्री नंबर 15100 पर निःशुल्क कॉल कर आवश्यक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
अपील
यदि विवाद समझौते से सुलझ सकता है तो वर्षों की मुकदमेबाजी क्यों? 12 सितंबर की नेशनल लोक अदालत में पहुंचिए और राजीनामे के जरिए विवाद को विराम देने का अवसर उठाइए।

