मूकनायक/नरेश कुमार जाटव/कैलादेवी/ करौली/राजस्थान।
करौली। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई एवं मनोचिकित्सा विभाग, मेडिकल कॉलेज के समन्वित सहयोग से विभिन्न जागरूकता गतिविधियों का आयोजन किया गया।
इस दौरान नर्सिंग महाविद्यालय में संगोष्ठी और मनोचिकित्सा विभाग में मानसिक स्वास्थ्य परिचर्चा का आयोजन कर उपस्थित लोगों को आत्महत्या रोकथाम की सामूहिक शपथ दिलाई गई।
कार्यक्रम में विभागाध्यक्ष मनोरोग डॉ. प्रेमराज मीना, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संतोष गुप्ता, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. जीतेन्द्र मीना, डॉ. आदर्श जिंदल, डॉ. अपूर्वा सिंह सहित साइकेट्रिक नर्स गौरव गोयल, सीआरए गौरव शर्मा व नर्सिंग स्टाफ उपस्थित रहा।
संगोष्ठी में वक्ताओं ने नर्सिंग विद्यार्थियों को आत्महत्या के शुरुआती संकेतों को पहचानने और संकट की स्थिति में व्यक्ति को अकेला न छोड़कर समय पर विशेषज्ञ सहायता दिलाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
परिचर्चा के दौरान अस्पताल में उपचाररत मरीजों व उनके परिजनों को मानसिक तनाव एवं भावनात्मक संकट की पहचान करने के संबंध में जानकारी दी गई।
प्रभारी मनोचिकित्सक डॉ प्रेमराज मीना ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करना कमजोरी नहीं, बल्कि सहायता प्राप्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर सरकार की टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 के बारे में भी विस्तार से बताया गया, ताकि संकट के समय कोई भी व्यक्ति तुरंत विशेषज्ञ सहायता प्राप्त कर सके।
सीएमएचओ डॉ. सतीश मीना ने बताया कि आत्महत्या की रोकथाम केवल एक दिन का अभियान नहीं, बल्कि हमारी सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है।
संवेदनशील संवाद, समय पर पहचान, भावनात्मक सहयोग और उचित उपचार के माध्यम से अनेक अनमोल जिंदगियों को बचाया जा सकता है।
पहचानें ये चेतावनी संकेत, बचाएं अनमोल जिंदगी मनोचिकित्सकों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति अत्यधिक निराशा की बातें करे, खुद को दूसरों पर बोझ बताए, अचानक सामाजिक दूरी बना ले या सोशल मीडिया पर विदाई जैसे संदेश साझा करने लगे
तो ये गंभीर चेतावनी संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति की बात को बिना किसी पूर्वाग्रह के ध्यान से सुनना चाहिए, उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए और तुरंत टेली-मानस हेल्पलाइन 14416 या किसी विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क कर काउंसलिंग दिलवानी चाहिए।

