आज कुछ लोग लगातार यह सलाह दे रहे हैं कि बहुजन समाज पार्टी को किसी दूसरी पार्टी के साथ गठबंधन करके चुनाव लड़ना चाहिए उनका तर्क है कि गठबंधन से ज्यादा सीटें मिलेंगी और सरकार बनाने की संभावना बढ़ जाएगी।
लेकिन सवाल यह है कि क्या गठबंधन ही पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का एकमात्र रास्ता है?- बिल्कुल नहीं।
इसका सबसे बड़ा उदाहरण उत्तर प्रदेश का 2007 विधानसभा चुनाव है उस चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने अकेले चुनाव लड़कर 206 विधानसभा सीटें जीती थीं जबकि पूर्ण बहुमत के लिए 202 सीटों की जरूरत थी। बीएसपी को लगभग 30.4% वोट मिले और बहन मायावती जी के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनी।
यानी इतिहास गवाह है कि बीएसपी को सत्ता में आने के लिए किसी दूसरी पार्टी की बैसाखी की अनिवार्यता नहीं है।
अब कुछ लोग कहेंगे कि वह 2007 था आज परिस्थितियां अलग हैं -बिल्कुल, परिस्थितियां अलग हैं।
लेकिन 2007 का उदाहरण एक बात तो साफ-साफ साबित करता है— कि अकेले चुनाव लड़कर पूर्ण बहुमत हासिल करना असंभव नहीं है।
और यही बात बहन मायावती जी की रणनीति को समझने के लिए जरूरी है गठबंधन में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ सीटों का नहीं होता, बल्कि वोट ट्रांसफर का होता है अगर बीएसपी का मजबूत वोट गठबंधन के साथी उम्मीदवार को मिल जाए लेकिन साथी दल का वोट उसी मजबूती से बीएसपी उम्मीदवार को न मिले तो कागज पर गठबंधन मजबूत दिखाई दे सकता है लेकिन जमीन पर उसका फायदा बराबर नहीं मिलता।
यही वह राजनीतिक चिंता है जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बीएसपी का दलित वोट किसी गठबंधन के दूसरे दल को मिल जाए और बदले में बीएसपी को अपेक्षित वोट न मिले तो फायदा किसका हुआ?
*इस सवाल का जवाब ईमानदारी से देना होगा।*
इसलिए यह कहना कि “गठबंधन कर लो तभी सरकार बनेगी” बहुत सरल निष्कर्ष है राजनीति इतनी सरल नहीं होती।
2007 में बीएसपी ने अकेले चुनाव लड़ा 206 सीटें जीतीं लगभग 30.4% वोट हासिल किए।
और पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई यह आंकड़ा किसी भाषण की बात नहीं है यह चुनावी इतिहास है।
हाँ 2012 का परिणाम भी हमें नहीं भूलना चाहि उस चुनाव में बीएसपी 80 सीटों पर सिमट गई और लगभग 25.9% वोट मिले। इससे यह भी सीख मिलती है कि केवल अकेले चुनाव लड़ना अपने आप में जीत की गारंटी नहीं है।
असल लड़ाई संगठन की है।
यही कारण है कि भाईचारा कमेटियां, बूथ स्तर का मजबूत संगठन, सर्व समाज से संवाद और अलग-अलग सामाजिक वर्गों के बीच भरोसा पैदा करना बेहद जरूरी है इस कार्य में सभी का सहयोग भी अनिवार्य है।
बहन मायावती जी की राजनीति को केवल “गठबंधन नहीं करने की जिद” कह देना उनके राजनीतिक तर्क को समझने से इनकार करना है।
उनकी सोच का आधार यह है कि बीएसपी अपने संगठन और अपने सामाजिक आधार को मजबूत करे सर्व समाज के बीच जाए और अपने दम पर सत्ता हासिल करने की क्षमता बनाए।
और इसमें कोई असंभव बात नहीं है।
अगर 2007 में उत्तर प्रदेश की जनता ने बीएसपी को अकेले लड़कर पूर्ण बहुमत दिया था तो भविष्य में भी ऐसा राजनीतिक विकल्प संभव है लेकिन इसके लिए सिर्फ सोशल मीडिया पर पोस्ट डालना काफी नहीं होगा घर-घर जाना होगा।
1. भाईचारा कमेटियां मजबूत करनी होंगी।
2. बूथ मजबूत करना होगा।
3. सर्व समाज से संवाद करना होगा
4. और जनता के बीच भरोसा पैदा करना होगा।
गठबंधन करना या न करना एक राजनीतिक रणनीति का विषय है।
लेकिन यह मान लेना कि “अकेले बीएसपी कभी सरकार नहीं बना सकती”, न तो इतिहास के आंकड़ों से साबित होता है और न ही राजनीति के नियम से।
*गठबंधन विकल्प हो सकता है, मजबूरी नहीं।*
बीएसपी को किसी के सहारे की राजनीति नहीं, अपने संगठन और अपने जनाधार को मजबूत करने की राजनीति करनी चाहिए।
क्योंकि—
2007 में रास्ता दिख चुका है।
206 सीटें इतिहास में दर्ज हैं।
पूर्ण बहुमत की सरकार बन चुकी है।
अब जरूरत उस इतिहास को सिर्फ याद करने की नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर संगठन को फिर मजबूत करने की है।
लेखक- अवतार सिंह

