जब समाजसेवा की दो धाराएं मिलीं, तो 110 नन्हे सपनों को मिला उम्मीद का सहारा
मूकनायक
बिलासपुर छत्तीसगढ़
/////दहलीज़ फाउंडेशन और अमान अंसारी फाउंडेशन की अनूठी संयुक्त पहल, घोड़ादाना स्कूल के विद्यार्थियों को पानी की बोतल एवं आईडी कार्ड वितरित/////
बिलासपुर। समाज में बदलाव केवल बड़े-बड़े वादों से नहीं, बल्कि उन छोटे-छोटे प्रयासों से आता है जो किसी जरूरतमंद के जीवन में वास्तविक सुविधा और उम्मीद लेकर आते हैं। इसी सोच को सार्थक करते हुए दहलीज़ फाउंडेशन एवं अमान अंसारी फाउंडेशन ने घोड़ादाना स्कूल, तारबाहर में संयुक्त रूप से एक ऐसी प्रेरणादायक पहल की, जिसने न केवल 110 विद्यार्थियों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि समाजसेवा के क्षेत्र में सहयोग, संवेदनशीलता और टीमवर्क का खूबसूरत संदेश भी दिया।
दोनों संस्थाओं द्वारा कक्षा पहली से पांचवीं तक अध्ययनरत 110 बच्चों को पानी की बोतल एवं आईडी कार्ड वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान बच्चों की प्रतिभा, शिक्षकों का समर्पण और दोनों संस्थाओं के सदस्यों की सेवा भावना ने आयोजन को महज सामग्री वितरण कार्यक्रम न बनाकर एक यादगार एवं प्रेरणादायक अवसर बना दिया।
दो संस्थाएं, एक उद्देश्य—बच्चों का बेहतर भविष्य
आज शहर में अनेक संस्थाएं शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में अपने-अपने स्तर पर उल्लेखनीय कार्य कर रही हैं। लेकिन जब दो संस्थाएं अपनी अलग-अलग क्षमताओं को जोड़कर किसी जरूरतमंद वर्ग के लिए काम करती हैं, तो उसका प्रभाव और भी व्यापक हो जाता है।
दहलीज़ फाउंडेशन और अमान अंसारी फाउंडेशन की यह पहल इसी सामूहिक सोच का उदाहरण बनी। दोनों संस्थाओं ने संदेश दिया कि समाजसेवा में प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहयोग की भावना होनी चाहिए। एक संस्था की ताकत दूसरी संस्था की ताकत बन जाए, तो समाज के लिए किए जाने वाले कार्यों को नई दिशा मिल सकती है।
‘चाय बनेगी स्याही’ से शिक्षा की अलख जगा रहीं हीना खान
दहलीज़ फाउंडेशन की संस्थापक हीना खान पिछले लगभग पांच वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में निस्वार्थ भाव से सक्रिय हैं। युवा अवस्था में ही शिक्षा को समाजसेवा का माध्यम बनाकर उन्होंने जिस तरह लगातार कार्य किया है, वह शहर के युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय है।
उनकी चर्चित पहल ‘चाय बनेगी स्याही’ शिक्षा के क्षेत्र में एक अनूठा प्रयास है। हर वर्ष रिवर व्यू में अपनी टीम के साथ चाय का स्टॉल लगाकर उससे प्राप्त राशि का उपयोग जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा एवं शैक्षणिक आवश्यकताओं के लिए करना उनकी संवेदनशील सोच को दर्शाता है।
इसके अतिरिक्त हीना खान स्कूलों, महाविद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों में जाकर शिक्षा के प्रति जागरूकता अभियान भी चलाती हैं। स्वयं छात्रा होने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के बावजूद समाजसेवा के लिए समय निकालना उनके समर्पण को दर्शाता है। शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यों को विभिन्न मंचों पर सम्मान भी प्राप्त हो चुका है।
घोड़ादाना स्कूल के बच्चों के साथ उनका जुड़ाव भी निरंतर रहा है। पिछले लगभग दो वर्षों में उनके द्वारा कभी बच्चों के लिए जूते, कभी बैग और कभी शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई गई है। भविष्य में भी बच्चों की जरूरत के अनुसार सहयोग जारी रखने की उनकी भावना सराहनीय है।
इस अवसर पर हीना खान के साथ उनकी सहयोगी आरती साहू भी मौजूद रहीं। आरती साहू की सक्रिय सहभागिता ने भी कार्यक्रम को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
प्रोजेक्ट गुल्लक से जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा को सहारा
वहीं अमान अंसारी फाउंडेशन शिक्षा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र में लगातार जनकल्याणकारी गतिविधियों के माध्यम से अपनी अलग पहचान बना रही है। संस्था के संस्थापक अलीम अंसारी का मानना है कि समाजसेवा केवल किसी एक वर्ग या व्यक्ति तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि जरूरत के समय जरूरतमंद तक पहुंचना ही वास्तविक सेवा है।
संस्था की सराहनीय पहलों में ‘प्रोजेक्ट गुल्लक’ विशेष रूप से उल्लेखनीय है। बच्चों एवं समाज में बचत की भावना के साथ जरूरतमंदों की शिक्षा और सहायता से जोड़ने वाली यह पहल समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का प्रयास है। इसी तरह संस्था द्वारा निःशुल्क परामर्श हेतु टोकन व्यवस्था जैसे विशेष जनकल्याणकारी अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को उचित मार्गदर्शन एवं चिकित्सा संबंधी परामर्श उपलब्ध कराने में सहायता करना है। ऐसे अभियानों से जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलती है और समाजसेवा का वास्तविक उद्देश्य सार्थक होता है। इन जनकल्याणकारी पहलों के लिए संस्था को विभिन्न मंचों पर सम्मानित किया जा चुका है। संस्था के कार्यों और सेवा भावना को देखते हुए इसके संस्थापक अलीम अंसारी को अनेक सामाजिक एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के रूप में भी आमंत्रित किया जाता है।
अलीम अंसारी की कार्यशैली की एक खास विशेषता टीमवर्क और सामूहिक निर्णय है। उनका मानना है कि समाजसेवा किसी एक व्यक्ति के दम पर लंबे समय तक प्रभावी ढंग से नहीं की जा सकती। इसके लिए पूरी टीम का विश्वास, सहयोग और सक्रिय भागीदारी जरूरी है। उनसे जुड़े संस्था के सक्रिय सदस्य अपने-अपने स्तर पर लगातार सहयोग देते हैं। टीम के सदस्यों में आपसी तालमेल और सेवा के प्रति समर्पण संस्था की गतिविधियों को मजबूती प्रदान करता है। यही कारण है कि संस्था से जुड़े सदस्य स्वयं को संस्था के कार्यों का अभिन्न हिस्सा मानते हुए जरूरत के समय आगे आकर जिम्मेदारी निभाते हैं।
विशेष रूप से संस्था से जुड़े डॉक्टरों की टीम भी निःस्वार्थ भाव से अपना समय और विशेषज्ञता जरूरतमंदों के लिए उपलब्ध कराती है। स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्य करने वाले इन चिकित्सकों का सहयोग संस्था की स्वास्थ्य संबंधी पहलों को और अधिक प्रभावी बनाता है। कार्यक्रम में अमान अंसारी फाउंडेशन के संस्थापक अलीम अंसारी के साथ संस्था के सक्रिय सदस्य एवं उनके अजीज़ मित्र शब्बीर सिद्दीकी भी उपस्थित रहे। संस्था की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता और सहयोग की भावना के लिए शब्बीर सिद्दीकी की भूमिका भी सराहनीय रही। उनकी तरह संस्था से जुड़े अन्य सदस्य भी अपने व्यक्तिगत व्यस्तताओं के बावजूद समाजसेवा के कार्यों में समय देकर टीम भावना को मजबूत करते हैं। यही सामूहिक प्रयास किसी भी सामाजिक संस्था की वास्तविक ताकत होता है।
पूजा तिवारी की मेहनत ने जीता सभी का दिल
कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधान अध्यापिका श्रीमती पूजा तिवारी की भूमिका भी विशेष रूप से सराहनीय रही। सीमित संसाधनों के बावजूद बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए उनका समर्पण और संवेदनशीलता उपस्थित सभी लोगों के लिए प्रेरणा का विषय बनी। कक्षा पहली से पांचवीं तक के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए वे अपनी दो अन्य अध्यापिकाओं के साथ लगातार प्रयासरत हैं। बच्चों को केवल किताबी ज्ञान देना ही नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में आगे बढ़ने, अपने लक्ष्य को पहचानने और अच्छे संस्कारों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अलीम अंसारी जब पहली बार हीना खान के माध्यम से इस विद्यालय पहुंचे और बच्चों की प्रतिभा देखी, तो वे विशेष रूप से प्रभावित हुए। उन्होंने महसूस किया कि संसाधनों की सीमाओं के बावजूद यदि शिक्षक का समर्पण मजबूत हो तो बच्चों की प्रतिभा को निखारा जा सकता है।
प्रधान अध्यापिका पूजा तिवारी के समर्पण को देखते हुए संस्था ने भविष्य में बच्चों की शिक्षा एवं उच्च शिक्षा की दिशा में आवश्यकता के अनुसार हरसंभव सहयोग करने का संकल्प व्यक्त किया।
बच्चों की प्रस्तुति ने मोहा मन
कार्यक्रम के दौरान कक्षा तीसरी, चौथी एवं पांचवीं के विद्यार्थियों ने शिक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण से संबंधित शानदार प्रस्तुतियां दीं। नन्हे बच्चों की प्रतिभा और आत्मविश्वास देखकर उपस्थित सभी सदस्य अभिभूत नजर आए।
बच्चों को प्रोत्साहित करते हुए दोनों संस्थाओं के सदस्यों ने उन्हें नियमित पढ़ाई, अनुशासन, शिक्षकों के सम्मान और माता-पिता के मार्गदर्शन को जीवन में अपनाने की सीख दी।
बच्चों से कहा गया कि वे केवल भविष्य के नागरिक नहीं हैं, बल्कि आज के भी महत्वपूर्ण नागरिक हैं। इसलिए वर्तमान को बेहतर बनाने के लिए मेहनत, शिक्षा और अच्छे संस्कारों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है। यदि वर्तमान मजबूत होगा तो भविष्य निश्चित रूप से उज्ज्वल होगा। कार्यक्रम में विद्यालय की प्रधान अध्यापिका एवं अध्यापिकाओं द्वारा दोनों संस्थाओं के सदस्यों को पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान का यह तरीका अपने आप में पर्यावरण संरक्षण का खूबसूरत संदेश था। दोनों संस्थाओं के सदस्यों ने भी विद्यालय परिवार, प्रधान अध्यापिका एवं अध्यापिकाओं की सराहना करते हुए बच्चों की शिक्षा के लिए आवश्यकता पड़ने पर शैक्षणिक सामग्री उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया। यह सिर्फ बोतल और आईडी कार्ड नहीं, बच्चों के प्रति समाज की जिम्मेदारी का संदेश है! कार्यक्रम में वितरित की गई पानी की बोतल और आईडी कार्ड को केवल एक सामग्री के रूप में देखना इस पहल के उद्देश्य को छोटा करना होगा। इसके पीछे बच्चों की सुविधा, पहचान, स्वच्छता और उनके प्रति समाज की जिम्मेदारी का भाव जुड़ा है। एक बच्चे के हाथ में दी गई पानी की बोतल उसे अपनी सेहत और स्वच्छता के प्रति जागरूक कर सकती है, वहीं आईडी कार्ड उसे विद्यालय और अपनी पहचान से जोड़ने का माध्यम बन सकता है। इससे भी महत्वपूर्ण है कि जब कोई सामाजिक संस्था किसी बच्चे तक पहुंचती है तो उसके भीतर यह विश्वास पैदा होता है कि समाज उसके साथ खड़ा है! दहलीज़ फाउंडेशन की संस्थापक हीना खान और अमान अंसारी फाउंडेशन के संस्थापक अलीम अंसारी की कार्यशैली भले ही अपने-अपने क्षेत्र में अलग हो, लेकिन दोनों की सोच का केंद्र समाज के जरूरतमंद लोगों की सहायता और शिक्षा को बढ़ावा देना है। हीना खान जहां युवावस्था में ही शिक्षा के लिए जागरूकता और संसाधन जुटाने का अभियान चला रही हैं, वहीं अलीम अंसारी शिक्षा एवं स्वास्थ्य दोनों क्षेत्रों में अपनी टीम के साथ लगातार सेवा कार्य कर रहे हैं। इन दोनों संस्थाओं का एक साथ आना इस बात का प्रमाण है कि अलग-अलग संस्थाओं की ताकत को जोड़कर समाज के लिए अधिक प्रभावी कार्य किया जा सकता है। दोनों संस्थाओं से जुड़े सदस्यों का मानना है कि समाज में कार्य करने वाली हर संस्था अपने स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। लेकिन कई बार किसी जरूरतमंद तक सहायता इसलिए नहीं पहुंच पाती क्योंकि संसाधन सीमित होते हैं। ऐसे में यदि संस्थाएं एक-दूसरे की मदद करें और शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं अन्य जनकल्याणकारी क्षेत्रों में मिलकर काम करें, तो कई ऐसी समस्याओं का समाधान संभव है जिन्हें अकेले हल करना मुश्किल दिखाई देता है। घोड़ादाना स्कूल में हुआ यह आयोजन इसी सोच का जीवंत उदाहरण है। इस पहल की सबसे बड़ी उपलब्धि यही रही कि इससे केवल 110 बच्चों को सामग्री नहीं मिली, बल्कि समाज को एक विचार मिला! संस्थाएं एक-दूसरे की प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि सहयोगी बनें।
यदि इसी भावना के साथ शहर की अन्य सामाजिक संस्थाएं भी आगे आएं, तो जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, पर्यावरण संरक्षण और अन्य सामाजिक जरूरतों के लिए एक मजबूत सहयोगी तंत्र तैयार किया जा सकता है! हीना खान, आरती साहू, अलीम अंसारी, शब्बीर सिद्दीकी, प्रधान अध्यापिका पूजा तिवारी एवं विद्यालय की समर्पित अध्यापिकाओं की सहभागिता से आयोजित यह कार्यक्रम इसलिए भी खास रहा क्योंकि यहां सम्मान केवल देने वाले का नहीं, बल्कि सेवा करने वाले हर व्यक्ति का हुआ।
एक कार्यक्रम खत्म हुआ, लेकिन एक संदेश छोड़ गया—
बच्चों को संसाधन दीजिए, उन्हें प्रोत्साहन दीजिए, उनके शिक्षकों का सम्मान कीजिए और संस्थाओं को एक-दूसरे का सहयोगी बनाइए। क्योंकि आज का शिक्षित, संस्कारी और आत्मविश्वासी बच्चा ही कल के मजबूत समाज की नींव बनेगा।
दहलीज़ फाउंडेशन एवं अमान अंसारी फाउंडेशन की यह संयुक्त पहल इसी उज्ज्वल भविष्य की दिशा में उठाया गया एक छोटा, लेकिन बेहद सार्थक कदम है।





