पीसीपीएनडीटी नियमों के उल्लंघन का आरोप, डॉक्टर की अनुपस्थिति, पैथोलॉजी संचालन और दस्तावेजों को लेकर भी उठे सवाल
मूकनायक/इंद्रसेन गौतम सब जिला ब्यूरो चीफ बस्ती/उत्तर प्रदेश
सिद्धार्थनगर। इटवा–डुमरियागंज मार्ग स्थित इटवा के लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर पर 13 अगस्त को स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की गई जांच में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आने का मामला प्रकाश में आया है। यह जांच शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा की गई बताई जा रही है जांच के दौरान नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल की मौजूदगी में केंद्र के संचालन और अभिलेखों की जांच की गई नोडल अधिकारी के अनुसार, जांच के दौरान सबसे पहली गंभीर कमी अल्ट्रासाउंड के लिए लगाए गए चिकित्सक डॉ. हेमंत की उपस्थिति को लेकर सामने आई जांच टीम को बताया गया कि डॉ. हेमंत पिछले करीब दो माह से सिद्धार्थनगर नहीं आए हैं। इसके बाद केंद्र संचालक द्वारा दूरभाष के माध्यम से डॉ. हेमंत से बात कराने की बात सामने आई बिना डॉक्टर की मौजूदगी के अल्ट्रासाउंड किए जाने का आरोप जांच के दौरान 13 अगस्त को केंद्र पर चिकित्सक की अनुपस्थिति में अल्ट्रासाउंड किया जाता हुआ स्क्रीन पर दिखाई देने की बात भी नोडल अधिकारी द्वारा बताई गई। इसकी फोटो जांच टीम द्वारा सुरक्षित किए जाने की जानकारी दी गई है। यदि जांच में यह तथ्य प्रमाणित होता है तो यह पीसीपीएनडीटी अधिनियम एवं निर्धारित नियमों के गंभीर उल्लंघन का मामला बन सकता है बिना अनुमति सीटी स्कैन का बोर्ड, मशीन मौके पर नहीं मिली जांच में केंद्र पर सीटी स्कैन से संबंधित बोर्ड भी लगा मिला। नोडल अधिकारी के अनुसार सीटी स्कैन संचालन के लिए विभागीय अनुमति के संबंध में सवाल उठे, जबकि मौके पर सीटी स्कैन मशीन मौजूद नहीं मिली। ऐसे में विभाग द्वारा यह भी जांच का विषय बनाया जा सकता है कि बिना अनुमति सीटी स्कैन संबंधी बोर्ड क्यों लगाया गया था पैथोलॉजी जांच को लेकर भी उठे सवाल जांच के दौरान पैथोलॉजी संचालन और उससे जुड़े पंजीकरण अभिलेखों को लेकर भी टीम ने सवाल उठाए। जिस चिकित्सक के नाम से पंजीकरण संबंधी दस्तावेज बताए गए, उनसे केंद्र संचालक द्वारा जांच टीम की मौजूदगी में बात नहीं कराए जाने की बात सामने आई मौके पर लैब टेक्नीशियन की अनुपस्थिति की जानकारी भी नोडल अधिकारी द्वारा दी गई नोडल अधिकारी के मुताबिक, लैब में चिकित्सक और संबंधित तकनीकी स्टाफ की अनुपस्थिति में जांच किए जाने के संकेत भी मिले हैं इससे पैथोलॉजी संचालन की वैधता और मानकों के अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं फायर एनओसी और दस्तावेजों की तारीखों पर भी संदेह जांच के दौरान केंद्र के दस्तावेजों में दर्ज तारीखों को लेकर भी टीम ने आपत्ति जताई। नोडल अधिकारी के अनुसार एक एनओसी पर वर्ष 2019 अंकित है, जबकि हस्ताक्षर के ऊपर 2021 की तारीख दिखाई देने की बात कही गई है इन दस्तावेजों की वास्तविकता और वैधता की पुष्टि संबंधित विभागीय अभिलेखों से कराए जाने की जरूरत है। बिना अनुमति सेंटर स्थानांतरित करने का भी आरोप स्वास्थ्य विभाग के नोडल अधिकारी के अनुसार लक्ष्मी अल्ट्रासाउंड सेंटर को विभागीय अनुमति के बिना एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किए जाने का भी मामला सामने आया है। इसे पीसीपीएनडीटी के नियमों के तहत गंभीर उल्लंघन बताया गया है सीएमओ को प्रस्तुत होगी जांच रिपोर्ट, दोष मिलने पर होगी कठोर कार्रवाई नोडल अधिकारी डॉ. मानवेंद्र पाल ने बताया कि जांच के दौरान सामने आई सभी कमियों एवं अनियमितताओं की विस्तृत रिपोर्ट मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रस्तुत की जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर यदि आगे पीसीपीएनडीटी अधिनियम का उल्लंघन, पैथोलॉजी संचालन में अनियमितता अथवा अन्य गंभीर कमियां पाई जाती हैं तो संबंधित के विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच में सामने आए सभी बिंदुओं, चिकित्सकों की उपस्थिति, अल्ट्रासाउंड संचालन, पैथोलॉजी सेवाओं, सीटी स्कैन संबंधी अनुमति, दस्तावेजों और सेंटर के स्थानांतरण से जुड़े अभिलेखों का सत्यापन कराया जाएगा। इसके बाद जांच रिपोर्ट के आधार पर विभागीय स्तर पर आगे की कार्रवाई तय होगी फिलहाल पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जांच रिपोर्ट और सीएमओ स्तर से होने वाली कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं

