मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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कृतज्ञता (आभार व्यक्त करना) केवल एक भावना या अभिव्यक्ति नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और संस्कारों की सबसे मजबूत नींव है। जब कोई व्यक्ति किसी से प्राप्त सहयोग, प्रेम या संसाधन के प्रति आदर और कृतज्ञता व्यक्त करता है, तो वह ना केवल अपने संस्कारों का परिचय देता है, बल्कि समाज में सकारात्मकता के प्रसार का कारक भी बनता है क्योंकि संस्कार वे मूल्य हैं जो मनुष्य के आचरण और विचारों को गढ़ते हैं।
कृतज्ञता व्यक्ति के भीतर ‘अहंकार’ को समाप्त कर ‘विनम्रता’ को जन्म देती है। कृतज्ञ व्यक्ति यह स्वीकार करता है कि उसकी सफलता या जीवन में दूसरों (माता-पिता, शिक्षकों, प्रकृति और समाज) का भी योगदान है। जब हम दूसरों के प्रति आभार महसूस करते हैं, तो हमारे भीतर उनके प्रति सम्मान और संवेदना बढ़ती है। यही गुण एक सुसंस्कृत चरित्र की पहचान हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

