मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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आज के आधुनिक समाज में इंसान का सबसे कड़वा सच यही है कि बाहर से साफ़-सुथरा चेहरा, ज़बान पर असीम मिठास और सम्मानजनक ‘आप’ शब्द, लेकिन मन के भीतर ईर्ष्या, कपट और स्वार्थ का ज़हर भरा है। “चेहरा साफ, दिल में दाग, मुंह पर ‘आप’ और पीछे सांप” की उक्ति ने वर्तमान समय की सामाजिक प्राथमिकताओं और गिरते नैतिक मूल्यों को उजागर किया है। आज का दौर में लोग मीठी बातें बोलकर सामने वाले का विश्वास जीतते हैं और अवसर मिलते ही पीछे से आघात करते हैं। चेहरे की मुस्कान अब प्रेम या अपनेपन का प्रतीक नहीं, बल्कि असली इरादों को छिपाने वाली एक ढाल बन गई है। जब तक किसी से स्वार्थ या मतलब सिद्ध होता है, तब तक ज़बान पर ‘आप’ और सम्मान की मिठास बनी रहती है और मतलब निकलते ही वही इंसान आस्तीन का सांप साबित होता है।
इस मतलबी माहौल में सबसे अधिक चोट उन निश्छल और सच्चे लोगों को पहुँचती है, जो बाहरी शिष्टाचार को ही दिल की सच्चाई मान बैठते हैं। समाज ने भौतिक और तकनीकी क्षेत्र में तो अभूतपूर्व प्रगति की है, लेकिन भावनात्मक और नैतिक स्तर पर गहरा पतन हुआ है। इसलिए आज के समय में सजगता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। मीठी बातों और आकर्षक मुखौटों से प्रभावित होने के बजाय इंसान के चरित्र और उसकी नियत को परखना आवश्यक है। इसके साथ ही, इस दिखावे की संस्कृति के बीच हमें स्वयं भी अपने दिल को साफ़ और व्यवहार को निष्कपट बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

