Tuesday, September 29, 2026
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गलत उपचार से मरीज की मौत के मामले में गुदमा के दो लोगों पर FIR के निर्देश

कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच में बिना आवश्यक चिकित्सा योग्यता चिकित्सा व्यवसाय का खुलासा, सीएमएचओ ने खंड चिकित्सा अधिकारी को दिए सख्त कार्रवाई के आदेश

मूकनायक समाचार | संवाददाता सत्यशील गोंडाने | बालाघाट (मध्यप्रदेश)।

बालाघाट जिले के बिरसा विकासखंड अंतर्गत ग्राम गुदमा में कथित गलत उपचार के बाद मरीज की मौत के मामले ने गंभीर रूप ले लिया है। मामले की शिकायत के बाद कलेक्टर के निर्देश पर जांच कराई गई। जांच में ग्राम गुदमा निवासी सुमन बिसेन एवं चन्द्रपाल कलिहारे द्वारा बिना आवश्यक चिकित्सा योग्यता के चिकित्सा व्यवसाय किए जाने की बात सामने आने की जानकारी स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. परेश उपलप ने दोनों के विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए हैं।

मामला ग्राम सहेगांव निवासी सविता मरावी की शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके पति लोकेश मरावी का चन्द्रपाल कलिहारे एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गुदमा में पदस्थ नर्स द्वारा उपचार किया गया था। शिकायतकर्ता के अनुसार उपचार के बाद उनके पति लोकेश मरावी की 5 दिसंबर 2025 को मृत्यु हो गई। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर द्वारा पूरे मामले की जांच कर दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। कलेक्टर के निर्देश के बाद खंड चिकित्सा अधिकारी, बिरसा द्वारा मामले की जांच की गई।

खंड चिकित्सा अधिकारी द्वारा की गई जांच में ग्राम गुदमा निवासी सुमन बिसेन एवं चन्द्रपाल कलिहारे द्वारा आवश्यक चिकित्सा योग्यता के बिना चिकित्सा व्यवसाय किए जाने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर दोनों के विरुद्ध नियम विरुद्ध चिकित्सा व्यवसाय करने के मामले में कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई।

सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप ने जांच रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम, 1987 की धारा 13 के उल्लंघन एवं नियम विरुद्ध चिकित्सा व्यवसाय करने के मामले में सुमन बिसेन एवं चन्द्रपाल कलिहारे के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश खंड चिकित्सा अधिकारी को दिए हैं। एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले से जुड़े तथ्यों, उपचार की परिस्थितियों, संबंधित व्यक्तियों की भूमिका और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करेगी।

लोकेश मरावी की मृत्यु को लेकर परिजनों की ओर से लगाए गए उपचार संबंधी आरोपों के कारण मामला गंभीर हो गया है। हालांकि, मरीज की मौत के संबंध में लगाए गए गलत उपचार के आरोप और मृत्यु के बीच प्रत्यक्ष आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण पुलिस जांच एवं आगामी कानूनी प्रक्रिया के बाद ही होगा। मृत्यु का वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था और उपचार में किसी प्रकार की आपराधिक लापरवाही हुई या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण जांच एवं कानूनी प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगा। ऐसे में मामले से जुड़े सभी तथ्यों, उपचार के दौरान की परिस्थितियों और उपलब्ध चिकित्सकीय दस्तावेजों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण होगी।

गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में बिना आवश्यक योग्यता चिकित्सा व्यवसाय करने वाले लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जाती रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में कई बार लोग आसानी से उपलब्ध होने के कारण ऐसे व्यक्तियों से उपचार करा लेते हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

गुदमा मामले में कलेक्टर के निर्देश पर हुई जांच और जांच रिपोर्ट के आधार पर स्वास्थ्य विभाग द्वारा एफआईआर के निर्देश दिए जाने से अब मामला पुलिस कार्रवाई के चरण में पहुंच गया है। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में बिना आवश्यक योग्यता चिकित्सा व्यवसाय करने वालों की पहचान, निगरानी और शिकायत मिलने पर समयबद्ध कार्रवाई की आवश्यकता भी सामने आई है।

स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों को योग्य एवं सुरक्षित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ऐसे में बिना आवश्यक योग्यता चिकित्सा व्यवसाय के मामलों में प्रभावी निगरानी, निष्पक्ष जांच और नियमानुसार कार्रवाई जरूरी है। गुदमा मामले में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश के बाद अब पुलिस जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट होगी। मामले में अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण सक्षम जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।

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