Tuesday, September 29, 2026
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हथकरघे की खनक से गूंजा वारासिवनी, बुनकरों के हुनर को मिला सम्मान

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर बुनकरों और शिल्पियों को दीं शासन की योजनाओं की जानकारी, आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ने का आह्वान

मूकनायक/ सत्यशील गोंडाने वारासिवनी/बालाघाट/मध्यप्रदेश

हथकरघा एवं हस्तशिल्प की समृद्ध परंपरा, कला और संस्कृति को संरक्षण देने तथा बुनकरों एवं शिल्पियों के योगदान को सम्मानित करने के उद्देश्य से वारासिवनी में 12वां राष्ट्रीय हथकरघा दिवस उत्साहपूर्वक मनाया गया। हथकरघा एवं हस्तशिल्प संचालनालय भोपाल से प्राप्त निर्देशों के अनुसार सहायक संचालक, जिला हथकरघा कार्यालय वारासिवनी में आयोजित कार्यक्रम में बुनकरों और शिल्पियों की भागीदारी रही।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ग्राम पंचायत वारा के सरपंच मान. सूर्यभान पुशाम ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपस्थित अतिथियों ने हथकरघा क्षेत्र से जुड़े बुनकरों एवं शिल्पियों के परंपरागत हुनर को देश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

कार्यक्रम में ग्रामोद्योग विस्तार अधिकारी वारासिवनी मान. एस.के. डेकाटे, हथकरघा बुनकर क्लस्टर क्लब वारासिवनी के अध्यक्ष मान. राजकुमार गोखले, संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम वारासिवनी के प्रभारी अधिकारी मान. एस.के. आजाद सहित हथकरघा कार्यालय के अधिकारी-कर्मचारी, बुनकर एवं शिल्पी उपस्थित रहे।

हुनर को बाजार और बुनकरों को योजनाओं से जोड़ने पर जोर

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि हथकरघा केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि देश की समृद्ध कला, संस्कृति और सदियों पुरानी पारंपरिक विरासत का जीवंत स्वरूप है। ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक परिवार आज भी अपने पारंपरिक कौशल के माध्यम से हथकरघा एवं हस्तशिल्प से जुड़े हुए हैं। इनके हुनर को संरक्षण देने के साथ आधुनिक बाजार से जोड़ना समय की आवश्यकता है।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित बुनकरों एवं शिल्पियों को शासन द्वारा उनके हित में संचालित विभिन्न योजनाओं, सुविधाओं एवं प्रयासों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि शासन का उद्देश्य हथकरघा एवं हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हुए आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।

परंपरागत हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संदेश

वक्ताओं ने बुनकरों एवं शिल्पियों से आह्वान किया कि वे अपने पारंपरिक हुनर को नई पीढ़ी तक पहुंचाएं और अधिक से अधिक युवाओं को हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जोड़ें। आधुनिक तकनीक, बेहतर डिजाइन और बाजार की मांग के अनुरूप उत्पाद तैयार कर हथकरघा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक ले जाने पर भी जोर दिया गया।

कार्यक्रम में बुनकरों एवं शिल्पियों ने शासन की योजनाओं की जानकारी प्राप्त की तथा अपने अनुभव भी साझा किए। उपस्थित अधिकारियों ने उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को समझते हुए शासन की उपलब्ध सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस का आयोजन इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि बुनकरों के हाथों में सिर्फ धागे नहीं, बल्कि देश की कला और संस्कृति की विरासत है। इस विरासत को संरक्षण, सम्मान और बाजार उपलब्ध कराकर ही हथकरघा क्षेत्र को मजबूत बनाया जा सकता है।

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