मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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सत्य के बिना सादगी केवल एक दिखावा है और सादगी के बिना सत्य का आचरण कठिन है। जब लोग भीतर से सत्यनिष्ठ और बाहर से सरल (सहज) होते हैं, तो समाज में अपराध कम होते हैं और आपसी भाईचारा बढ़ता है। आज के आधुनिक और चकाचौंध भरे युग में इन दोनों मूल्यों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है। यदि हमें एक स्वस्थ, सुरक्षित और समृद्ध भविष्य का निर्माण करना है तो अपनी जीवनशैली में सत्य की गहराई और सादगी की सहजता को दोबारा अपनाना होगा क्योंकि आडंबरहीन जीवन शैली सादगी जीवन जीने का एक सहज और सुंदर दृष्टिकोण है।
सत्य और सादगी एक-दूसरे के पूरक हैं। जहाँ सत्य विचारों को विचारशीलता और स्पष्टता देता है, वहीं सादगी आचरण को विनम्र और स्वीकार्य बनाती है। बिना सत्य के सादगी केवल एक दिखावा बनकर रह जाती है और बिना सादगी के सत्य कभी-कभी कठोर प्रतीत हो सकता है। जब ये दोनों मूल्य एक साथ मिलते हैं तो समाज में ना केवल शांति और सद्भाव का विस्तार होता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार होता है, जहाँ व्यक्तिगत विकास और सामूहिक कल्याण एक साथ संभव हो पाते हैं। यही एक आदर्श और समृद्ध समाज की असली पहचान है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

