मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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अक्सर देखा जाता है कि ज़रा सी बात, किसी गलतफहमी या अहंकार की वजह से हुई एक छोटी सी लड़ाई इंसान को इतना अंधा कर देती है कि वह अपने सालों पुराने प्यार को पल भर में खत्म करने का फैसला कर लेता है।
क्या एक छोटी सी कड़वाहट इतने सारे मीठे पलों से बड़ी हो सकती है? बिल्कुल नहीं। प्यार खत्म करना बहुत आसान है, लेकिन उस प्यार को बनाना और सहेजना सालों की मेहनत मांगता है। जब हम लड़ाई की वजह से प्यार खत्म करते हैं, तो हम केवल एक रिश्ता नहीं तोड़ते, बल्कि उन सभी यादों, भरोसे और उम्मीदों को भी दफना देते हैं जो हमने साथ मिलकर बनाई थीं।
इससे कहीं बेहतर और समझदारी भरा रास्ता यह है कि हम प्यार से अपनी लड़ाई को खत्म कर लें।
प्यार में इतनी ताकत होती है कि वह बड़े से बड़े मतभेद और अहंकार को पिघला सकता है। जब हम सही होने से ज़्यादा ‘साथ होने’ को अहमियत देने लगते हैं, तब समझ आता है कि माफ़ी मांगना या माफ़ कर देना हारना नहीं, बल्कि रिश्ते को जिताना है। गुस्सा और शिकायतें कुछ पलों की होती हैं, लेकिन प्यार ताउम्र का साथी है। इसलिए, अपनी ईगो को किनारे रखकर संवाद करें, एक-दूसरे को समझें और बातचीत से हर उलझन सुलझाएं। लड़ाई को अपने प्यार पर हावी ना होने दें, बल्कि प्यार को इतना गहरा बनाएं कि कोई भी लड़ाई उसके सामने टिक ही न पाए।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

