Tuesday, September 29, 2026
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हौसलों की उड़ान: हाथों से दिव्यांग राखी ने पैरों से लिखकर 10वीं बोर्ड परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की

73.6 प्रतिशत अंकों के साथ रची सफलता की नई मिसाल, संघर्ष और आत्मविश्वास से बनी प्रेरणा; बस्तर सांसद ने भेंट की इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर

दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास के बल पर शारीरिक चुनौतियों को मात देते हुए बस्तर जिले के ग्राम बेंगलूर निवासी कुमारी राखी नाग ने प्रेरणादायी सफलता हासिल की है। जन्म से लोकोमोटर दिव्यांगता से प्रभावित राखी अपने दोनों हाथों का उपयोग नहीं कर पाती हैं, लेकिन उन्होंने दाहिने पैर से लिखकर छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की 10वीं बोर्ड परीक्षा में 73.6 प्रतिशत अंक प्राप्त करते हुए प्रथम श्रेणी में सफलता अर्जित की है।

पैरों से लिखकर पूरी की पढ़ाई

स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, नानगुर की छात्रा राखी नाग अपनी दैनिक पढ़ाई से लेकर परीक्षा तक का पूरा कार्य दाहिने पैर से लिखकर करती हैं। सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।

राखी के पिता धनसिंह नाग एक गैस एजेंसी में मजदूरी करते हैं, जबकि उनकी माता चौती नाग ने आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद बेटी की शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए हर कदम पर उसका उत्साहवर्धन किया।

शिक्षकों के सहयोग से मिली सफलता

विद्यालय निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी अनिल दास को राखी की विशेष परिस्थिति की जानकारी मिली। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा मंडल के प्रावधानों के अनुसार उन्हें 10वीं बोर्ड परीक्षा में राइटर (लेखन सहायक) की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

विद्यालय की कक्षा नवमी की छात्रा नव्या निर्मलकर ने परीक्षा के दौरान राइटर की जिम्मेदारी निभाई। वहीं विद्यालय के प्राचार्य विनोद सिंह भदौरिया तथा शिक्षकों ने निरंतर मार्गदर्शन और प्रोत्साहन देकर राखी का आत्मविश्वास मजबूत किया, जिसका परिणाम उनकी उल्लेखनीय सफलता के रूप में सामने आया।

बस्तर सांसद ने बढ़ाया उत्साह

राखी नाग की संघर्षपूर्ण सफलता की जानकारी मिलने पर बस्तर सांसद महेश कश्यप स्वयं उनके ग्राम बेंगलूर स्थित निवास पहुंचे। उन्होंने राखी के अदम्य साहस और उपलब्धि की सराहना करते हुए उनकी पढ़ाई और आवागमन को सुगम बनाने के उद्देश्य से उन्हें इलेक्ट्रॉनिक व्हीलचेयर भेंट की। सांसद ने उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए आगे भी हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।

संघर्ष और आत्मविश्वास बनी मिसाल

राखी नाग की सफलता यह संदेश देती है कि यदि परिवार का सहयोग, शिक्षकों का मार्गदर्शन और स्वयं पर अटूट विश्वास हो, तो कोई भी शारीरिक चुनौती सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकती। पैरों से लिखकर 10वीं बोर्ड परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण करने वाली राखी आज उन सभी विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं, जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को साकार करने का साहस रखते हैं।

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