Tuesday, September 29, 2026
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संत रविदास का समरसता और समानता का संदेश ही विकसित भारत की आधारशिला : मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

650वीं जयंती वर्ष पर कलश वंदन महाअभियान में की कई बड़ी घोषणाएं, अगले वर्ष संत रविदास जयंती पर सार्वजनिक अवकाश, मांस एवं मदिरा बिक्री पर रहेगा प्रतिबंध

रायपुर, 4 अगस्त 2026। संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज की 650वीं जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर के दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आयोजित कलश वंदन महाअभियान के कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि संत रविदास ने समाज को समरसता, समानता, भक्ति, श्रम और सामाजिक न्याय का जो अमर संदेश दिया, वही विकसित, समरस और सशक्त भारत की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि संत रविदास के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने सदियों पहले थे और उनका जीवन मानवता, समान अधिकार तथा आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणास्रोत है।

मुख्यमंत्री ने वाराणसी के सीर गोवर्धनपुर स्थित संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र मिट्टी एवं जल से भरे कलश को श्रद्धापूर्वक अपने मस्तक पर धारण कर संत रविदास के छायाचित्र के समक्ष स्थापित किया। विधिवत पूजन-अर्चन कर उन्होंने इसे सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक बताया। इसके बाद मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों से आए प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे तथा गांव-गांव तक इन्हें पहुंचाने के लिए रवाना किए गए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर महाअभियान का शुभारंभ किया।

मुख्यमंत्री ने की महत्वपूर्ण घोषणाएं

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने संत रविदास के सम्मान में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं करते हुए कहा कि वर्ष 2027 में माघी पूर्णिमा के अवसर पर मनाई जाने वाली संत रविदास जयंती पर पूरे प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन राज्यभर में मांस एवं मदिरा की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी।

उन्होंने घोषणा की कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत शिरोमणि गुरु रविदास के नाम से एक नया राज्य अलंकरण पुरस्कार प्रारंभ किया जाएगा। साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण भी संत गुरु रविदास के नाम पर किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश—

“ऐसा चाहूं राज मैं, जहाँ मिले सबन को अन्न।
छोट-बड़ो सब सम बसैं, रविदास रहैं प्रसन्न।।”

—का अंकन छत्तीसगढ़ विधानसभा में कराने के लिए विधानसभा अध्यक्ष से चर्चा कर आवश्यक प्रयास किए जाएंगे।

संतों ने हर युग में समाज को दिखाई नई दिशा

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत संतों, ऋषियों और महापुरुषों की पावन भूमि है। जब-जब समाज में अन्याय, अत्याचार, ऊंच-नीच, छुआछूत और भेदभाव जैसी विकृतियां बढ़ीं, तब-तब संतों और महापुरुषों ने समाज को नई दिशा प्रदान की। संत रविदास ने अपने जीवन और उपदेशों के माध्यम से सामाजिक समरसता, समानता और भक्ति का ऐसा संदेश दिया, जिसने समाज को नई चेतना प्रदान की।

उन्होंने कहा कि संत रविदास ने तत्कालीन शासक सिकंदर लोदी के धर्मांतरण के दबाव का साहसपूर्वक विरोध किया और यह संदेश दिया कि सभी मनुष्य समान हैं तथा ईश्वर तक पहुंचने का मार्ग केवल सच्ची भक्ति और सदाचार है। उनका प्रसिद्ध संदेश “मन चंगा तो कठौती में गंगा” आज भी समाज को आंतरिक शुद्धता और आध्यात्मिकता का मार्ग दिखाता है।

मुख्यमंत्री ने संत रविदास से जुड़ा प्रसंग साझा करते हुए कहा कि कठौती में गंगा प्रकट होने की घटना केवल आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि यह संदेश देती है कि निर्मल मन और सच्ची श्रद्धा से ईश्वर की प्राप्ति संभव है।

‘विकास भी, विरासत भी’ से आगे बढ़ रहा है देश

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” के मंत्र पर आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री का “विकास भी, विरासत भी” का दृष्टिकोण भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक धरोहर के संरक्षण का मार्गदर्शक सिद्धांत बन चुका है।

उन्होंने बताया कि संत रविदास की जन्मभूमि से लाई गई पवित्र मिट्टी और जल से भरे कलश देशभर के मठों, मंदिरों और आस्था केंद्रों तक पहुंचाए जा रहे हैं। यह अभियान समाज के प्रत्येक वर्ग, प्रत्येक गांव और प्रत्येक परिवार को जोड़ने वाला राष्ट्रीय समरसता अभियान है।

गांव-गांव तक पहुंचेगा समरसता का संदेश

मुख्यमंत्री ने डॉ. सनम जांगड़े के नेतृत्व में सीर गोवर्धनपुर से पवित्र कलश लेकर आए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सराहना करते हुए कहा कि उनका यह प्रयास संत रविदास के विचारों को जन-जन तक पहुंचाने और सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान प्रत्येक गांव, प्रत्येक समाज और प्रत्येक घर तक संत रविदास के समानता और सामाजिक एकता के संदेश को पहुंचाएगा।

संत रविदास का जीवन समाज को जोड़ने की प्रेरणा : गुरु खुशवंत साहेब

कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब ने कहा कि संत रविदास ने छोटे-बड़े के भेद को समाप्त कर समानता और सामाजिक एकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार संत रविदास के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है तथा कलश वंदन अभियान सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सशक्त करेगा।

समरसता ही भारत की सबसे बड़ी शक्ति : अजय जामवाल

अजय जामवाल ने कहा कि संत रविदास का समरसता का संदेश आज पूरे विश्व के लिए प्रासंगिक है। उन्होंने समाज को जाति, धर्म और भेदभाव के आधार पर विभाजित करने वाली शक्तियों से सावधान रहने का आह्वान करते हुए कहा कि संतों की शिक्षाओं को व्यवहार में उतारकर ही सामाजिक एकता और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने सभी प्रतिनिधियों से पवित्र कलश को प्रत्येक जिले के सभी आस्था केंद्रों तक पहुंचाने का आग्रह किया।

संत रविदास के विचार आज भी समाज को नई दिशा देते हैं : सरोज पाण्डेय

सरोज पाण्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि संत रविदास ने समानता, श्रम, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों का संदेश देकर समाज को नई दिशा दी। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं और उन्हें जन-जन तक पहुंचाना हम सभी की जिम्मेदारी है।

बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं श्रद्धालु रहे उपस्थित

कार्यक्रम में टंकराम वर्मा, दयाल दास बघेल, लक्ष्मी राजवाड़े, अनुज शर्मा, मोतीलाल साहू, इंद्र कुमार साहू, संपत अग्रवाल, रोहित साहू, ध्रुव कुमार मिर्धा, राजीव लोचन महाराज, महंत खेलुराम पैगवार, संत युधिष्ठिर लाल सहित अनेक जनप्रतिनिधि, संत समाज के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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