Tuesday, September 29, 2026
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वन धन योजना से जशपुर की महिलाओं की बदली तकदीर

च्यवनप्राश सहित हर्बल उत्पाद बनाकर बनीं आत्मनिर्भर, वन धन विकास केंद्र ने किया 1.91 करोड़ रुपये का कारोबार

जशपुर जिले की ग्रामीण महिलाओं ने यह साबित कर दिया है कि सही प्रशिक्षण, शासकीय सहयोग और बाजार की उपलब्धता से आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी जा सकती है। प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना के तहत संचालित वन धन विकास केंद्र सहकारी समिति, पनचक्की की अध्यक्ष कांता बाई के नेतृत्व में महिलाओं ने वनोपज आधारित उत्पाद तैयार कर आर्थिक सशक्तीकरण की मिसाल कायम की है।

वन धन विकास योजना से जुड़े इस केंद्र ने उरांव जनजाति की महिलाओं को रोजगार के साथ सम्मानजनक पहचान भी दिलाई है। पहले महिलाएं केवल वनोपज संग्रह पर निर्भर थीं, लेकिन अब वे वनोपज का मूल्य संवर्धन कर विभिन्न हर्बल उत्पाद तैयार कर बेहतर आय अर्जित कर रही हैं।

छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ और ट्राइफेड (TRIFED) के सहयोग से महिलाओं को आधुनिक तकनीक, उत्पाद निर्माण, पैकेजिंग और विपणन का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही आवश्यक मशीनें और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए गए, जिससे उनके आत्मविश्वास और कार्यक्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने औषधीय वनोपज से च्यवनप्राश सहित कई हर्बल उत्पादों का निर्माण शुरू किया। इन उत्पादों को ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ ब्रांड के तहत बाजार में उतारा गया, जहां उन्हें अच्छी पहचान और मांग मिली।

मार्च 2026 तक वन धन विकास केंद्र, पनचक्की ने लगभग 1.91 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। इससे समिति से जुड़ी महिलाओं की आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और वे अपने परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं।

आर्थिक रूप से सशक्त बनने के साथ ही महिलाओं का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। आज वे अपने गांव और समाज में सम्मानजनक पहचान बना चुकी हैं। कांता बाई के नेतृत्व में यह केंद्र अन्य ग्रामीण और जनजातीय महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

वन धन विकास योजना स्थानीय वनोपज के मूल्य संवर्धन के माध्यम से ग्रामीण एवं जनजातीय महिलाओं को रोजगार, आय और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाली प्रभावी पहल के रूप में उभर रही है। यह योजना महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है।

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