मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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शिक्षा केवल आजीविका कमाने का साधन नहीं, बल्कि मनुष्य के सर्वांगीण विकास की कुंजी है। शिक्षा एक ऐसा अमूल्य धन है जिसे ना कोई चुरा सकता है और ना ही समय के साथ इसका ह्रास होता है। जब जीवन में सब कुछ सहज और सुखद होता है, तब शिक्षा और विद्वता व्यक्ति के चरित्र में निखार लाती है। यह समाज में सम्मान, विनम्रता और वैचारिक प्रखरता देती है। जिस प्रकार आभूषण शरीर की शोभा बढ़ाते हैं, उसी प्रकार विद्या व्यक्ति के व्यक्तित्व को कांतिमान बनाती है। संकट और असफलता के समय धन-दौलत या भौतिक संसाधन भले ही साथ छोड़ दें, लेकिन व्यक्ति का ज्ञान और विवेक हमेशा उसके साथ रहता है।
शिक्षा मनुष्य को सही निर्णय लेने, कठिन परिस्थितियों से उबारने और नए मार्ग तलाशने में ढाल बनकर रक्षा करती है। उम्र के ढलने पर जब शारीरिक शक्ति क्षीण होने लगती है, तब जीवन भर अर्जित किया गया ज्ञान ही व्यक्ति की सबसे बड़ी पूंजी बनता है। यह मानसिक संबल देता है, एकाकीपन को दूर करता है और समाज को मार्गदर्शन देने योग्य बनाए रखता है। इसलिए विद्या एक ऐसा अक्षय कोष है जो जीवन के हर दौर में मनुष्य का साथ निभाती है। सुख में यह हमें शालीन बनाती है, दुखों में साहस देती है और ढलती उम्र में आत्मसम्मान का आधार बनती है। इसलिए, ज्ञान अर्जन की दिशा में किया गया हर प्रयास जीवन भर का सबसे बड़ा निवेश है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

