मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में हर व्यक्ति के पास कुछ ना कुछ संसाधन उपलब्ध होते हैं—चाहे वह समय हो, ऊर्जा, धन, ज्ञान या फिर अवसर, लेकिन मंजिल तक वही पहुँच पाता है, जो उपलब्ध संसाधनों की सीमितता को समझकर उनका सही दिशा में उपयोग करना जानता है। अक्सर लोग अपनी असफलताओं का दोष संसाधनों की कमी पर मढ़ देते हैं, जबकि वास्तविकता यह है कि संसाधनों की प्रचुरता से अधिक महत्वपूर्ण उनका सही नियोजन है। इतिहास गवाह है कि कई महान व्यक्तित्वों ने अत्यंत सीमित साधनों में भी असाधारण उपलब्धियाँ हासिल कीं, क्योंकि उन्होंने अपने समय, बुद्धि और ऊर्जा का एक-एक क्षण सही लक्ष्य पर केंद्रित किया।
इसके विपरीत, असीमित संसाधनों के बावजूद यदि दिशाहीनता और बर्बादी हो, तो नाकामी ही हाथ लगती है। जब आप अपने साधनों का सही आकलन करते हैं, तो व्यर्थ के कार्यों में आपकी ऊर्जा नष्ट नहीं होती । सफलता किसी चमत्कार का परिणाम नहीं, बल्कि उपलब्ध अवसरों और साधनों के सटीक संयोजन का फल है। जैसे एक कुशल शिल्पी साधारण पत्थर को भी तराशकर प्रतिमा बना देता है, वैसे ही एक विवेकशील इंसान अपने सीमित संसाधनों को भी अपनी ताकत बनाकर मंजिल हासिल कर लेता है। इसलिए, शिकायत करने के बजाय जो आपके पास है, उसी का श्रेष्ठतम और रचनात्मक उपयोग करना शुरू करें—सफलता निश्चित रूप से आपके कदम चूमेगी।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

