Tuesday, September 29, 2026
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छत्तीसगढ़ के दूरस्थ क्षेत्रों को मिलेगी मजबूत डिजिटल पहचान, 2,305 नए मोबाइल टावरों के लिए मुख्यमंत्री ने केंद्र से मांगी मंजूरी

केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात, डिजिटल कनेक्टिविटी के विस्तार पर हुई विस्तृत चर्चा

रायपुर, 31 जुलाई। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली स्थित संचार भवन में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से मुलाकात कर छत्तीसगढ़ के दूरस्थ, जनजातीय, सीमावर्ती एवं दुर्गम क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी को सशक्त बनाने के लिए डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) योजना के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 नए मोबाइल टावरों को शीघ्र स्वीकृति प्रदान करने का आग्रह किया। बैठक में प्रदेश में मोबाइल नेटवर्क और हाई-स्पीड इंटरनेट सेवाओं के विस्तार से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के डिजिटल इंडिया के संकल्प को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि आज मजबूत मोबाइल नेटवर्क और इंटरनेट केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग, डिजिटल भुगतान, ई-गवर्नेंस और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच का आधार बन चुका है। दूरस्थ क्षेत्रों में डिजिटल कनेक्टिविटी मजबूत होने से नागरिकों को सरकारी सेवाओं का लाभ उनके गांवों के निकट ही उपलब्ध हो सकेगा।

2,305 नए मोबाइल टावरों से बदलेगी दूरस्थ क्षेत्रों की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश के अनेक जनजातीय और दुर्गम क्षेत्रों में भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अब तक संचार सुविधाओं का विस्तार चुनौतीपूर्ण रहा है। ऐसे क्षेत्रों में 2,305 नए मोबाइल टावर स्थापित होने से उन गांवों और बसाहटों तक भी विश्वसनीय मोबाइल एवं इंटरनेट नेटवर्क पहुंचेगा, जो लंबे समय से संचार सुविधाओं से वंचित हैं। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, बैंकिंग और रोजगार के नए अवसरों तक लोगों की पहुंच आसान होगी।

577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति पर जताया आभार

मुख्यमंत्री ने नक्सल प्रभावित एवं दुर्गम क्षेत्रों के लिए 577 अतिरिक्त मोबाइल टावरों की स्वीकृति प्रदान किए जाने पर केंद्र सरकार और केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह निर्णय विशेष रूप से बस्तर सहित कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले क्षेत्रों को डिजिटल मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मजबूत संचार नेटवर्क से प्रशासन और नागरिकों के बीच संवाद बेहतर होगा तथा आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित संपर्क संभव हो सकेगा।

489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को जारी हो चुकी है एनओसी

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार मोबाइल टावरों की स्थापना से संबंधित प्रक्रियाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। स्वीकृत 577 स्थानों में से 489 स्थानों के लिए बीएसएनएल को भूमि संबंधी अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) जारी किए जा चुके हैं, जबकि शेष 88 स्थानों के लिए प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जिन स्थानों पर अनुमति मिल चुकी है, वहां बीएसएनएल ने मोबाइल टावरों की स्थापना का कार्य प्रारंभ कर दिया है। राज्य सरकार संबंधित विभागों एवं जिला प्रशासन के माध्यम से आवश्यक समन्वय सुनिश्चित कर रही है ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।

शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं को मिलेगा नया आयाम

मुख्यमंत्री ने कहा कि मोबाइल और इंटरनेट नेटवर्क के विस्तार का सबसे अधिक लाभ विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं, किसानों और ग्रामीण परिवारों को मिलेगा। इंटरनेट सुविधा मजबूत होने से विद्यार्थियों को ऑनलाइन शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और डिजिटल अध्ययन सामग्री आसानी से उपलब्ध होगी। टेलीमेडिसिन के माध्यम से दूरस्थ क्षेत्रों के लोग विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त कर सकेंगे। वहीं डिजिटल बैंकिंग, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी), ऑनलाइन प्रमाण-पत्र, शासकीय योजनाओं और डिजिटल भुगतान जैसी सेवाओं तक ग्रामीणों की पहुंच भी अधिक सरल होगी।

बस्तर में डिजिटल सशक्तिकरण से विकास को मिलेगी नई गति

मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर सहित प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों में सड़क, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के साथ अब डिजिटल कनेक्टिविटी को भी समान प्राथमिकता दी जा रही है। बेहतर नेटवर्क उपलब्ध होने से स्थानीय युवाओं को ऑनलाइन शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसरों की जानकारी मिलेगी। किसानों को मौसम, आधुनिक कृषि तकनीक और बाजार संबंधी सूचनाएं समय पर प्राप्त होंगी, जबकि स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को डिजिटल बाजारों तक पहुंच आसान होगी।

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि डिजिटल भारत निधि के अंतर्गत प्रस्तावित 2,305 मोबाइल टावरों को स्वीकृति मिलने के बाद छत्तीसगढ़ के दूरस्थ और जनजातीय क्षेत्रों में डिजिटल क्रांति को नई गति मिलेगी तथा प्रदेश समावेशी विकास की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करेगा।

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