Tuesday, September 29, 2026
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राष्ट्रपति भवन में बस्तर की जनजातीय संस्कृति का ऐतिहासिक सम्मान …मांझी-चालकी और बस्तर पंडुम-2026 के विजेताओं का हुआ ऐतिहासिक सम्मान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं परोसा भोजन, बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की जताई इच्छा; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचा 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल

रायपुर, 30 जुलाई। बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक परंपराओं और सामाजिक नेतृत्व व्यवस्था को उस समय राष्ट्रीय स्तर पर ऐतिहासिक सम्मान मिला, जब मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता प्रतिभागियों, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के प्रतिनिधियों, पद्मश्री सम्मानित विभूतियों तथा विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों का 209 सदस्यीय दल राष्ट्रपति भवन पहुंचा। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पूरे प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत करते हुए उनके सम्मान में विशेष भोज का आयोजन किया।

कार्यक्रम का सबसे भावुक और ऐतिहासिक क्षण तब आया, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं सभी अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया। राष्ट्रपति की इस आत्मीयता से पूरा प्रतिनिधिमंडल भावविभोर हो उठा। भारतीय लोकतांत्रिक परंपरा में यह दृश्य अत्यंत दुर्लभ और विशेष माना गया।

प्रतिनिधिमंडल में उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा, संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री राजेश अग्रवाल, बस्तर के पारंपरिक मांझी-चालकी प्रतिनिधि, बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, पद्मश्री सम्मानित विभूतियां, जनप्रतिनिधि तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे।

राष्ट्रपति ने जाना बस्तर की संस्कृति और परंपराओं का वैभव

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, मांझी-चालकी प्रणाली तथा बस्तर पंडुम के आयोजन की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है और उसका संरक्षण पूरे देश की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बस्तर दशहरा में आने की जताई इच्छा

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा उनके हृदय के अत्यंत निकट है। भगवान जगन्नाथ की काष्ठ निर्मित प्रतिमा और बस्तर दशहरा की अनूठी परंपराओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उनका बस्तर की संस्कृति से विशेष आत्मीय जुड़ाव है।

राष्ट्रपति ने कहा कि मांझी उनके परिवार का भी हिस्सा रहे हैं और उनके पिता भी मांझी थे। उन्होंने जनजातीय समाज की पारंपरिक नेतृत्व व्यवस्था को सामाजिक एकता, सामुदायिक सहभागिता और सांस्कृतिक संरक्षण की मजबूत आधारशिला बताया।

बस्तर पंडुम ने दिलाई नई राष्ट्रीय पहचान

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर पंडुम छत्तीसगढ़ की जनजातीय परंपराओं, लोककलाओं और सांस्कृतिक विरासत का जीवंत उत्सव है। इस आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई प्रतिष्ठा दिलाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति देते हैं।

बस्तर अब शांति, विकास और समृद्धि की नई पहचान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और स्थानीय जनभागीदारी के परिणामस्वरूप बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए कहा कि बस्तर में आया सकारात्मक परिवर्तन पूरे देश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने मांझी और चालकी की भूमिका की प्रशंसा करते हुए उन्हें समाज और प्रशासन के बीच प्रभावी सेतु बताया।

राष्ट्रपति भवन में पहली बार दिखा बस्तर का ऐसा वैभव : अमित शाह

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि वे कई बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक जनजातीय वेशभूषा में इतने बड़े प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक बताया।

पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का क्षण : मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि राष्ट्रपति से बस्तर के प्रतिनिधिमंडल की यह आत्मीय भेंट पूरे छत्तीसगढ़, विशेषकर बस्तर अंचल के लिए गौरव और सम्मान का विषय है। उन्होंने कहा कि आज बस्तर की समृद्ध संस्कृति, लोक परंपराएं और जनजातीय विरासत देश के सर्वोच्च संवैधानिक मंच पर सम्मानित हुई हैं। बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने स्थानीय कलाकारों और जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर आने का औपचारिक निमंत्रण भी दिया और विश्वास व्यक्त किया कि उनके आगमन से बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर और व्यापक पहचान मिलेगी। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण कर देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े विभिन्न ऐतिहासिक स्थलों का अवलोकन भी किया।

राष्ट्रपति को भेंट की 300 वर्ष पुरानी ‘झिटकू-मिटकी’ की अनुपम कलाकृति

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, त्याग, समर्पण, लोकआस्था और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक मानी जाती है। लोकमान्यता के अनुसार अकाल के कठिन समय में झिटकू और मिटकी ने अपने त्याग और समर्पण से अमिट मिसाल कायम की थी। आज भी बस्तर में झिटकू को ‘खोड़िया राजा’ और मिटकी को ‘गप्पा देई’ के रूप में श्रद्धापूर्वक पूजा जाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, सचिव राहुल भगत, विशेष सचिव रजत बंसल, संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, बस्तर संभाग के आयुक्त डोमन सिंह, संस्कृति एवं राजभाषा विभाग के संचालक संजय कन्नौजे सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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