
बीईओ बसंत चतुर्वेदी की अनूठी पहल, शिक्षकों की उपस्थिति में होंगे सेवा पुस्तिका के प्रमाणित हस्ताक्षर, भविष्य की समस्याओं से मिलेगी राहत
बम्हनीडीह। विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बम्हनीडीह द्वारा शिक्षकों के हित में एक अभिनव एवं पारदर्शी पहल करते हुए “मोर सेवा पुस्तिका–मोर अधिकार–मोर जिम्मेदारी” अभियान की शुरुआत की जा रही है। इस अभियान का उद्देश्य शिक्षकों की सेवा पुस्तिका में दर्ज महत्वपूर्ण अभिलेखों का उनकी उपस्थिति में सत्यापन एवं प्रमाणीकरण कर भविष्य में सेवा संबंधी समस्याओं से बचाव सुनिश्चित करना है।
अभियान के प्रथम चरण में संकुल भवरेली, संकुल करनौद एवं संकुल लखुर्री के सहायक शिक्षक, शिक्षक एवं प्रधान पाठकों की सेवा पुस्तिकाओं का संधारण एवं सत्यापन कार्य शनिवार, 1 अगस्त 2026 को दोपहर 12 बजे से विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय, बम्हनीडीह में किया जाएगा। इस दौरान संबंधित शिक्षक स्वयं अपनी सेवा पुस्तिका का अवलोकन करेंगे तथा आवश्यक प्रविष्टियों का मिलान भी करेंगे।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी बसंत चतुर्वेदी स्वयं शिक्षकों की उपस्थिति में सेवा पुस्तिका के महत्वपूर्ण दस्तावेजों एवं प्रविष्टियों पर प्रमाणित हस्ताक्षर करेंगे। इनमें परिवार सूची, नॉमिनी फॉर्म-डी, फैमिली पेंशन, समूह बीमा फॉर्म-8, सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) तथा ग्रेच्युटी नामांकन (Nomination for Gratuity) सहित अन्य आवश्यक अभिलेख शामिल हैं। इससे सेवा निवृत्ति अथवा अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के दौरान शिक्षकों को अनावश्यक कठिनाइयों का सामना नहीं करना पड़ेगा।
बीईओ बसंत चतुर्वेदी ने बताया कि प्रत्येक शिक्षक का अपनी सेवा पुस्तिका पर अधिकार होने के साथ-साथ उसके संधारण की जिम्मेदारी भी है। इसी सोच के साथ “मोर सेवा पुस्तिका–मोर अधिकार–मोर जिम्मेदारी” अभियान प्रारंभ किया जा रहा है, ताकि सेवा अभिलेख पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित एवं पारदर्शी बनाए जा सकें।
उन्होंने कहा कि सेवा पुस्तिका किसी भी कर्मचारी के संपूर्ण सेवाकाल का महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है। यदि समय-समय पर इसकी प्रविष्टियों का सत्यापन एवं अद्यतन नहीं किया जाए तो भविष्य में पदोन्नति, वेतन निर्धारण, पेंशन, ग्रेच्युटी तथा अन्य सेवा लाभों के समय अनेक प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए सभी शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है।
बीईओ बसंत चतुर्वेदी ने संकुल भवरेली, संकुल करनौद एवं संकुल लखुर्री के सभी सहायक शिक्षकों, शिक्षकों तथा प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालयों के प्रधान पाठकों से निर्धारित तिथि एवं समय पर स्वयं उपस्थित होकर अपनी सेवा पुस्तिका का अवलोकन करने तथा आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन कराने का आग्रह किया है।
शिक्षा विभाग की यह पहल पारदर्शी प्रशासन, जवाबदेही और शिक्षकों के अधिकारों की सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। “मोर सेवा पुस्तिका–मोर अधिकार–मोर जिम्मेदारी” अभियान न केवल सेवा अभिलेखों को व्यवस्थित करेगा, बल्कि शिक्षकों में अपने अधिकारों एवं दायित्वों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाएगा।

