मूकनायक/रिपोर्टर इंद्रसेन गौतम/बस्ती /उत्तर प्रदेश
गौर बस्ती उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य विभाग प्रदेश में बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के दावे करते नहीं थकते, लेकिन बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी गौर की तस्वीर इन दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है यहां एक माह तक टीकाकरण के लिए सिरिंज जैसी बुनियादी सामग्री उपलब्ध नहीं रही जिससे मरीजों को बाहर से सिरिंज खरीदकर लानी पड़ती है जानकारी के अनुसार बिल्ली के काटने के बाद उपचार के लिए पहुंचे पत्रकार को अस्पताल में बताया गया कि टीका लगाने के लिए सिरिंज उपलब्ध नहीं है वहां पर टीकाकरण के लिए आए इकबाल से जब पूछताक्ष कि गई तो बुजुर्ग ने बताया कि उन्हें सिरिंज बाहर से खरीदकर लानी पड़ेगी अन्यथा टीका नहीं लग पाएगा टीकाकरण ड्यूटी में मौजूद फार्मासिस्ट राजकुमार ने बताया कि करीब एक माह से सिरिंज उपलब्ध नहीं है और इसकी मांग भेजी जा चुकी है लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी सीएमओ ने कहा कि सिरिंज जल्द उपलब्ध करा दी जाएगी सूत्रों के अनुसार सीएचसी गौर की एक्स रे व्यवस्था को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि अस्पताल में स्वीकृत एक्स रे टेक्नीशियन उपलब्ध नहीं रहते और एक्स रे सेवा डार्क रूम सहायक के माध्यम से संचालित कराई जा रही है हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है सूत्रों का यह भी कहना है कि पिछले तीन दिनों से मरीजों को एक्स रे की प्रिंट कॉपी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है और उन्हें मोबाइल फोन में तस्वीर देकर भेजा जा रहा है यदि ऐसा है तो जिन मरीजों के पास मोबाइल फोन नहीं हैं उन्हें इलाज के दौरान कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है डार्क रूम सहायक ने बताया कि इसकी मांग भेजी जा चुकी है लेकिन अब तक आपूर्ति नहीं हो सकी है ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब स्वास्थ्य मंत्री बेहतर व्यवस्थाओं के दावे कर रहा है तब एक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सिरिंज जैसी बुनियादी सामग्री तक समय पर उपलब्ध क्यों नहीं हो सकी यदि ऐसी मूलभूत व्यवस्थाओं की निगरानी प्रभावी होती तो मरीजों को इस तरह की परेशानियों का सामना शायद नहीं करना पड़ता स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता केवल भाषणों और दावों से नहीं बल्कि अस्पतालों में उपलब्ध सुविधाओं और मरीजों को मिलने वाली वास्तविक सेवाओं से तय होती है अस्पताल प्रशासन से जानकारी लेने का प्रयास किया गया तो अधीक्षक का कक्ष बंद मिला अब निगाह इस बात पर है कि स्वास्थ्य विभाग इस खबर को गंभीरता से लेकर व्यवस्था में सुधार करता है या फिर आश्वासन ही इलाज बने रहेंगे

