
33 जिलों के जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों का राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण सम्पन्न, स्थानीय समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान विकसित करने पर दिया गया जोर
रायपुर, 17 जुलाई। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल आयोजन की तैयारियों के तहत शुक्रवार को रीजनल साइंस सेंटर, रायपुर में जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों के लिए एक दिवसीय राज्य स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, छत्तीसगढ़ शासन तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (सीकॉस्ट) द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में प्रदेश के सभी 33 जिलों से आए समन्वयकों एवं शिक्षकों ने भाग लिया।

कार्यशाला का उद्देश्य शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की नई थीम, परियोजना निर्माण प्रक्रिया, वैज्ञानिक अनुसंधान पद्धति, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण तथा मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी देना था, ताकि प्रदेश के अधिक से अधिक विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं पर आधारित वैज्ञानिक परियोजनाएं तैयार कर राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें। कार्यक्रम का आयोजन प्रमुख सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग सोनमणि बोरा तथा छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद एवं रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक प्रशांत कविश्वर के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने बताया कि राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस देश का एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक कार्यक्रम है, जो 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के विद्यार्थियों को विज्ञान एवं अनुसंधान से जोड़ने का सशक्त मंच प्रदान करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थी वैज्ञानिक पद्धति अपनाते हुए अपने आसपास की समस्याओं की पहचान करते हैं, आंकड़ों का संग्रह एवं विश्लेषण करते हैं तथा नवाचार आधारित व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत करते हैं। ब्लॉक, जिला एवं राज्य स्तर पर चयनित बाल वैज्ञानिक राष्ट्रीय स्तर पर अपने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हैं।

विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम “साइंस एंड इनोवेशन फॉर सस्टेनेबिलिटी” की महत्ता पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, अनुसंधान क्षमता और नवाचार आधारित सोच विकसित करना अत्यंत आवश्यक है। शिक्षकों एवं जिला समन्वयकों से आग्रह किया गया कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की वास्तविक समस्याओं की वैज्ञानिक पहचान कर उनके व्यवहारिक और समाजोपयोगी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करें।
राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय ने राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की संपूर्ण रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए पात्रता, परियोजना निर्माण, अनुसंधान पद्धति, वैज्ञानिक लेखन, दस्तावेजीकरण, प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन प्रणाली की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक परियोजनाएं केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित न रहकर स्थानीय आवश्यकताओं और समाज की जरूरतों से जुड़ी होनी चाहिए, जिससे विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच के साथ सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना भी विकसित हो।
तकनीकी सत्र में विशेषज्ञों ने इस वर्ष की थीम से जुड़े विभिन्न उपविषयों पर विस्तार से चर्चा की। इनमें R5 तकनीक (Reduce, Reuse, Recover, Redesign एवं Recycle) के माध्यम से कचरा प्रबंधन, E4 मॉडल (Explore, Experiment, Enhance एवं Evolve) के जरिए ऊर्जा संरक्षण एवं नवाचार, जल संरक्षण एवं पुनर्चक्रण, खाद्य एवं कृषि की स्थिरता तथा भारतीय ज्ञान प्रणालियों के उपयोग जैसे विषय शामिल रहे। विशेषज्ञों ने बताया कि इन विषयों पर विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं के समाधान आधारित उत्कृष्ट वैज्ञानिक परियोजनाएं विकसित कर सकते हैं।
राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू ने कहा कि विद्यार्थियों को केवल विज्ञान की जानकारी देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनमें अनुसंधान, डेटा संग्रहण, विश्लेषण और समाधान आधारित सोच विकसित करना भी जरूरी है। उन्होंने मार्गदर्शकों को वैज्ञानिक लेखन, परियोजना प्रस्तुतीकरण एवं मूल्यांकन के मानकों से अवगत कराते हुए मिशन लाइफ (Mission LiFE) की भावना के अनुरूप अधिक से अधिक विद्यार्थियों की भागीदारी सुनिश्चित करने का आह्वान किया।
वनस्पति विज्ञान के वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो ने R5 सिद्धांतों की उपयोगिता बताते हुए कहा कि संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग, अपशिष्ट में कमी, पुनः उपयोग, पुनः डिज़ाइन तथा पुनर्चक्रण की अवधारणा पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने विद्यार्थियों को इन सिद्धांतों को दैनिक जीवन में अपनाकर प्रकृति संरक्षण में योगदान देने की प्रेरणा दी।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर के सहायक प्राध्यापक डॉ. आयुष खरे ने ऊर्जा संरक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि एआई आधारित तकनीकों के माध्यम से ऊर्जा दक्षता बढ़ाने, संसाधनों के बेहतर प्रबंधन तथा स्वच्छ ऊर्जा प्रणालियों के विकास को नई दिशा मिल रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को ऊर्जा क्षेत्र में नवाचार आधारित अनुसंधान के लिए प्रेरित किया। वहीं, प्रो. नमिता ब्राह्मे ने ऊर्जा संरक्षण, नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों तथा ऊर्जा दक्ष तकनीकों को सतत विकास की आधारशिला बताते हुए विद्यालयों में ऊर्जा ऑडिट, एलईडी अध्ययन, सौर कुकर एवं अन्य वैज्ञानिक परियोजनाओं को बढ़ावा देने का आह्वान किया।
कार्यशाला में वैज्ञानिक ‘ई’ एवं राज्य समन्वयक डॉ. जे. के. राय, वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. ए. के. पाठक, वैज्ञानिक ‘डी’ डॉ. अमित दुबे, राज्य अकादमिक समन्वयक प्रो. (डॉ.) केशव कांत साहू, वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ. वी. के. कानूनगो सहित अनेक विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम में प्रदेश के सभी 33 जिलों से आए जिला समन्वयकों एवं रिसोर्स शिक्षकों को राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 के सफल संचालन तथा अधिकाधिक बाल वैज्ञानिकों को शोध एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं से जोड़ने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यशाला के समापन पर बताया गया कि आगामी राज्य स्तरीय राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में प्रदेशभर से चयनित बाल वैज्ञानिक अपनी शोध परियोजनियों का प्रदर्शन करेंगे। इनमें उत्कृष्ट प्रतिभागियों को राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिलेगा। विशेषज्ञों ने विश्वास व्यक्त किया कि इस पहल से प्रदेश में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अनुसंधान संस्कृति को नई मजबूती मिलेगी तथा विद्यार्थी स्थानीय समस्याओं के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

