मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मानव जीवन में अध्ययन और पठन केवल एक आदत या परीक्षा पास करने का साधन नहीं है, बल्कि यह हमारे मानसिक क्षितिज को व्यापक बनाने वाला एक सशक्त माध्यम है। जब हम किसी पुस्तक को खोलते हैं, तो वास्तव में हम विचारों, संस्कृतियों और अनुभवों की एक नई दुनिया का द्वार खोल रहे होते हैं क्योंकि “पुस्तकें वे दर्पण हैं जिनमें हम केवल दूसरों को ही नहीं, बल्कि स्वयं को भी पहचानते हैं । जब हम दूसरों के संघर्षों, विचारों और जीवन-कहानियों को पढ़ते हैं, तो हम दुनिया को उनके दृष्टिकोण से देखना सीखते हैं। यह क्षमता हमें अधिक संवेदनशील और समझदार बनाती है ।
महान दार्शनिकों, वैज्ञानिकों और विचारकों के ग्रंथों को पढ़ना उनके जीवन भर के अनुभवों को कुछ ही घंटों में आत्मसात करने जैसा है। यह हमारे भीतर सही और गलत का अंतर करने की समझ विकसित करता है। आज के डिजिटल युग में, जहाँ ध्यान भटकाने वाली चीज़ें बहुत अधिक हैं, पठन का महत्व और भी बढ़ जाता है। यदि हम अपने सोचने के ढंग को बदलना चाहते हैं, समाज को एक व्यापक दृष्टिकोण से देखना चाहते हैं और अपने व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास करना चाहते हैं, तो पुस्तकों से बेहतर कोई मित्र नहीं हो सकता। अतः, अध्ययन को अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर ही हम एक प्रबुद्ध और प्रगतिशील समाज का निर्माण कर सकते हैं।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

