मूकनायक/ दुर्गेन्द्र सम्राट उप संपादक उत्तर प्रदेश बस्ती/ उत्तर प्रदेश
बस्ती। जिले के दसिया क्षेत्र में प्रस्तावित एथेनॉल प्लांट को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उनका विरोध किसी उद्योग या फैक्ट्री से नहीं बल्कि एथेनॉल उत्पादन से होने वाले संभावित पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर है ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्लांट स्थापित हुआ तो क्षेत्र में जल, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
प्रदर्शन की घोषणा के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया एथेनॉल प्लांट के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन के सख्त रवैये के कारण वे शांतिपूर्ण ढंग से अपना विरोध दर्ज नहीं करा सके उनका कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार भी उनसे छीनने का प्रयास किया गया ग्रामीणों ने दावा किया कि एथेनॉल प्लांट से निकलने वाले अपशिष्ट भूजल के अत्यधिक दोहन और संभावित प्रदूषण से खेती और पेयजल दोनों प्रभावित हो सकते हैं उनका कहना है कि क्षेत्र पहले से ही जल संकट की चुनौती का सामना कर रहा है और ऐसे में बड़े स्तर पर पानी की खपत करने वाला उद्योग भविष्य में हालात को और गंभीर बना सकता है किसानों का कहना है कि यदि भूजल स्तर गिरा और पर्यावरण दूषित हुआ तो खेती पर सीधा असर पड़ेगा जिससे हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
वही सांसद रामप्रसाद चौधरी और विधायक राजेंद्र प्रसाद चौधरी दोनों जनप्रतिनिधि लगातार धरना स्थल पर ग्रामीणों की मांगों का समर्थन करने पहुंचे और कह रहे हैं कि जब तक ग्रामीणों की मांगें पूरी नहीं होतीं तब तक एथेनॉल फैक्ट्री का विरोध जारी रहेगा किसानों की मांगे पूरी होगी आज नहीं तो कल।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह कि विरोध के दौरान ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों पर भी सवाल उठाए लोगों ने सांसद रामप्रसाद चौधरी और क्षेत्रीय विधायक राजेंद्र चौधरी को निशाने पर लेते हुए कहा कि यदि कई वर्षों से एथेनॉल प्लांट की प्रक्रिया चल रही थी तो क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी ग्रामीणों ने सवाल किया कि जनता के प्रतिनिधि होने के बावजूद उन्होंने इस विषय पर पहले कोई स्पष्ट जानकारी क्यों नहीं दी और न ही लोगों की राय लेने का प्रयास किया।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि विधायक राजेंद्र चौधरी के विद्यालय से लगभग 500 मीटर की दूरी पर एथेनॉल प्लांट स्थापित किया जा रहा है इसे लेकर लोगों में विशेष नाराजगी देखी गई।
विरोध के दौरान कुछ ग्रामीणों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रति भी नाराजगी व्यक्त की उनका कहना था कि स्थानीय स्तर पर जनभावनाओं को गंभीरता से नहीं लिया गया और लोगों की चिंताओं की अनदेखी की गई।
दूसरी ओर एथेनॉल प्लांट के निदेशक का कहना है कि इस परियोजना से क्षेत्र के युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलेगा उनके अनुसार उद्योग स्थापित होने से स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और आसपास के लोगों को रोजगार के नए अवसर प्राप्त होंगे उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सभी पर्यावरणीय मानकों का पालन किया जाएगा।
हालांकि ग्रामीण इस दावे से संतुष्ट नहीं हैं उनका कहना है कि रोजगार महत्वपूर्ण है लेकिन यदि इसके बदले जल स्रोत, पर्यावरण और लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होता है तो ऐसा विकास स्वीकार्य नहीं हो सकता उनका कहना है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ पानी और स्वस्थ वातावरण सबसे बड़ी आवश्यकता है।
प्रदर्शन के लिए जा रहे ग्रामीणों और महिलाओं को पुलिस द्वारा रास्ते में रोकने का भी आरोप लगाया गया ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन ने उन्हें आंदोलन करने की अनुमति नहीं दी जिससे लोगों में और अधिक नाराजगी फैल गई वहीं प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस बल तैनात किए जाने की बात कही जा रही है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया और परियोजना से जुड़े सभी पहलुओं पर पारदर्शिता नहीं बरती गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है फिलहाल दसिया एथेनॉल प्लांट का मुद्दा क्षेत्र में सामाजिक और राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है अब सभी की नजर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और कंपनी प्रबंधन के अगले कदम पर टिकी है।

