मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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बचपन की मासूमियत से लेकर बुढ़ापे के अनुभव तक, हर मोड़ अपने साथ नए सपने, असीमित उम्मीदें और एक नई ऊर्जा लेकर आता है। जीवन का कोई भी दौर ठहरने का नाम नहीं है, बल्कि यह निरंतर आगे बढ़ने और खुद को नए रंग में ढालने का उत्सव है। बचपन और अल्हड़पन सपनों की शुरुआत का वह दौर है, जहाँ हर चीज़ कौतूहल जगाती है और उम्मीदें असीमित होती हैं। युवावस्था का जोश वह अध्याय है, जहाँ ऊर्जा अपने चरम पर होती है। यहाँ सपने सिर्फ देखे नहीं जाते, बल्कि उन्हें हकीकत में बदलने का साहस और जूनून होता है। प्रौढ़ावस्था और परिपक्वता के दौर में ऊर्जा थोड़ी शांत लेकिन अधिक केंद्रित हो जाती है। जिम्मेदारियों के बीच नए सिरे से जीवन को समझने और संवारने की उम्मीदें जागती हैं।
वृद्धावस्था के सुकून में अक्सर अंत मान लिया जाता है, लेकिन वास्तव में यह अनुभवों की पोटली के साथ जीवन को एक गहरे, नए दृष्टिकोण से देखने का अध्याय है। ”उम्र सिर्फ कैलेंडर के पन्ने बदलना नहीं है, बल्कि हर पन्ने के साथ एक नई कहानी लिखने का अवसर है।” इसलिए जीवन की खूबसूरती इसी बात में है कि हम किसी एक पड़ाव पर बंधकर ना रहें। परिस्थितियाँ बदलती हैं, शरीर बदलता है, लेकिन मन की ऊर्जा और कुछ नया करने की उम्मीद कभी बूढ़ी नहीं होनी चाहिए। उम्र का हर दौर एक खाली पन्ने की तरह है—इसे बीते कल के पछतावे से भरने के बजाय, नए सपनों की स्याही से लिखना ही सच्चे मायनों में जीना है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

