Monday, July 27, 2026
Homeगुजरातबारिश से त्रस्त लोगों के आंसु पोछने की बजाय, मुख्यमंत्री ने बडी...

बारिश से त्रस्त लोगों के आंसु पोछने की बजाय, मुख्यमंत्री ने बडी एलईडी स्क्रीन पर वर्च्युअल निरीक्षण कर संतोष कर लिया !

चौथे स्तंभ माने जाने वाले मिडिया कर्मी व पत्रकारों को समीक्षा बैठक में प्रवेश नहीं देकर सरकार कौन सी वास्तविकता छुपाना चाहती है?

मूकनायक समाचार । सूरत

सूरत शहर में भारी बारिश के चलते हजारों परिवार कइ दिनों से मुश्किल परिस्थितियों से गुजर रहे हैं। यह गंभीर हालात के कारण लोगों में काफी गुस्सा फूट पडा है। ऐसी हालत में राज्य के मुख्यमंत्री सूरत का दौरा करने आए किन्तु उन्होंने या अन्य कोई नेताओं ने असरग्रस्त क्षेत्रों का दौरा करने की बजाय सूरत मनपा की आईसीसीसी बिल्डिंग के इमरजन्सी रिस्पेन्स सेन्टर की ओफिस में बैठना पसंद किया। मुख्यमंत्री समेत नेताओ और अधिकारियों ने बडी एलईडी स्क्रीन पर वर्च्युअल निरीक्षण कर भारी बारिश का आकलन किया। ऐसे में कई क्षेत्रों में सुरतियों में आक्रोश और आगबबूला हो गए जिसका नतिजा देखने मिला। परवट पाटिया में रोड पर उतर आए लोगों ने ट्रेक्टर लेकर निकले नेता-अधिकारियों को रास्ते में ही रोककर पूरे गंदे पानी में चलने को मजबूर किया। लोगों ने कहा कि नीचे उतरिए साहब ऐसे सर्वे नही किया जाता। कमर तक भरे पानी के कारण परवट पाटिया, डुंभाल, गीतानगर समेत के कई क्षेत्रों में स्थिति नाजुक है। गुरुवार को मुख्यमंत्री सूरत का दौरा करने आए थे, ऐसे में स्थानिय कोर्पोरेटर और मनपा अधिकारियों ट्रेक्टर पर सवार होकर पर्वत पाटिया क्षेत्र में दौरा करने निकले किन्तु लगातार तीन दिनों से घर में कैद आम जनता में गुस्सा फूट पडा था। आगबबूला हुए लोगों ने स्थानिय नेताओं और अधिकारियों के ट्रेक्टर को चारों ओर इकट्ठा होकर रोक दिया और आगे जाने नहीं दिया और ट्रेक्टर से नेताओं और अधिकारियों को नीचे उतरकर चलकर जाना पडा। आमजनता के सवालों के सामने अधिकारियों व नेताओं ने मौन धारण कर शर्मजनक स्थिति में आ गए और गंदे पानी में मजबूर होकर चलकर जाना पडा। लोगों का आरोप था कि वह जब भूखे प्यासे थे उस वक्त भाजपा नेताओं या अधिकारियों दिखे ही नहीं ऐसे कई सवालों पूछकर कहा कि हाईटेक मानी जाने वाली सूरत मनपा ने पानी आने वाला है इसकि जानकारी भी नहीं दी, स्थानिय लोगों ने आरोप लगाया कि मनपा द्वारा बोट रखी गई है किन्तु वह भी बार-बार बंद हो जाती है, इसलिए मनपा पानी में फंसे लोगों तक भोजन इत्यादि सामग्री पहुंचाने में नाकाम रही है।
केवल निवासियों ही नहीं किन्तु व्यापारी व दुकानदारों ने भी वेधक सवाल करते हुए बताया कि जब से खाडी कि दीवार बनाई गई है तब से बारिश के पानी का निकाल नहीं हो रहा और इसका योग्य निकाल भी नहीं किया जा रहा इस कारण बारिश की मौसम में यह क्षेत्र टापु जैसा बन जाता है। गंदा पानी दुकानों में भर जाने से लाखों रुपयों का सामान बर्बाद हो जाता है और सरकार की ओर से योग्य मुआवजा भी नहीं दिया जाता विभाग की गंभीर बेदरकारी के कारण सूरत का मध्यम वर्ग और व्यापारी वर्ग काफी गरीब होता जा रहा है।
भारी बारिश के चलते हजारों परिवार त्रस्त हो गए है ऐसे में सूरत का दौरा करने मुख्यमंत्री आए तो सही किन्तु लोगों की पूछताछ करने की बजाय सीधे ही एरपोर्ट के रास्ते से सूरत महानगरपालिका की आईसीसीसी बिल्डिंग में बैठक के स्थान पर पहुंच गए। जिस रास्ते से वह गुजरे उस वीआईपी रोड पर कोई जलभराव या गंभीर स्थिति नहीं है। जबकि जहां पर उन्हें जाना था वहां नहीं गए और लोगों के आंसु पोछने की बजाय एलईडी स्क्रीन पर वर्च्युअल निरीक्षण किया। सर्किट हाउस में आयोजित समीक्षा बैठक में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ माने जाने वाले पत्रकारों व मिडिया कर्मियों को भी प्रवेश नहीं दिया गया, इतना ही नहीं अंदर से कोई बात या विडियो बाहर नहीं पहुंचे उसका भी इन्तजाम करते हुए मनपा आयुक्त समेत नेताओं और सभी अधिकारियों का मोबाईल भी बाहर रखवाया गया। जनता सवाल पूछ रही है कि अगर सरकार और विभाग ने सब कुछ अच्छा काम किया है तो उनको मिडिया का डर क्यों है? मिडिया को अंदर प्रवेश क्यों नहीं दिया बंद खिडकी में गुप्तता रखकर सरकार कौन सी वास्तविकता छुपाना चाहती है? सूरत शहर व कामरेज, पलसाणा समेत के तहसीलों में 17 इंच से अधिक बारिश के चलते कई क्षेत्रों में पानी भर जाने से लोगों को काफी मुश्किल का सामना करना पडा। बारिश के चलते एक ही दिन में 11 डूबने से और 1 करंट लगने से मौत हो जाने की जानकारी मिली है। बारिश के चलते स्थानिय विभाग और एनडीआरएफ, एसडीआरएफ की टीम द्वारा बचाव कार्य शुरू किया गया। 8 जुलाई शाम तक 3,416 लोगों का रेस्क्यु किया गया जिसमें 3862 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। सूरत के पलसाणा, कामरेज, सूरत सिटी, बारडोली, अंबिका समेत क्षेत्रों में 10-10 इंच से अधिक बारीश के कारण पानी भर गए, चारों ओर पानी ही पानी नजर आने का द्रश्य देखने को मिला।

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments