मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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जीवन में हर इंसान सफलता और खुशी की तलाश में रहता है, लेकिन अक्सर लोग सफलता की अंधी दौड़ में अपनी खुशी खो देते हैं। ऐसा तब होता है, जब हमारे लक्ष्य दूसरों की उम्मीदों या सामाजिक दिखावे से तय होते हैं। इसके विपरीत, जब हमारे लक्ष्य हमारे मूल्यों और जुनून के आईने होते हैं तो सफलता और खुशी दोनों हमारे जीवन का सहज हिस्सा बन जाते हैं। यह हमारे जीवन के ईमानदारी, सेवा, स्वतंत्रता या परिवार जैसे वे नैतिक सिद्धांत हैं, जो हमें सही और गलत का अंतर बताते हैं । जब हमारे लक्ष्य इन मूल्यों के अनुकूल होते हैं, तो हमें मानसिक शांति मिलती है। जब हम अपने जुनून को अपना लक्ष्य बनाते हैं, तो काम, ‘काम’ ना रहकर एक आनंदमयी यात्रा बन जाता है।
सच्ची सफलता केवल बैंक बैलेंस या ऊंचे पद से नहीं मापी जा सकती। वास्तविक सफलता वह है, जहाँ उपलब्धि के साथ-साथ मन में असीम खुशी और संतोष हो। इसलिए, हमेशा ऐसे लक्ष्यों का चुनाव करें जो आपके व्यक्तित्व, आपकी मान्यताओं और आपके जुनून को दर्शाते हों। एक सार्थक और समृद्ध जीवन का रहस्य यही है कि हम बाहरी दुनिया के शोर को छोड़कर अपने भीतर झांकें। जब हमारे कदम हमारे मूल्यों की जमीन पर टिके हों और उन्हें आगे बढ़ाने वाली हवा हमारा जुनून हो, तो सफलता हमारे कदम चूमती है और खुशी हमारे दिल में स्थायी बसेरा कर लेती है। इसलिए, अपने लक्ष्यों को किसी और की डायरी से नहीं, बल्कि अपने दिल के आईने से देखकर तय करें।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

