Tuesday, September 29, 2026
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30 जुलाई तक पूरी करें धान की रोपाई, कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को जारी की सलाह

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मानसून सक्रिय होने के बाद कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को समय पर खरीफ फसलों की बुआई और धान की रोपाई पूरी करने की सलाह दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार शुरुआती देरी के बावजूद जुलाई के प्रथम सप्ताह में हुई अच्छी वर्षा से खेतों में पर्याप्त नमी उपलब्ध है, जिससे खेती के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन गई हैं।

इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने बताया कि अल-नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून लगभग 10 दिन विलंब से पहुंचा और जून में औसत से करीब 40 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई। हालांकि हालिया बारिश के बाद अधिकांश क्षेत्रों में खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है। जिन किसानों की नर्सरी तैयार है, वे तत्काल धान की रोपाई शुरू करें, जबकि नर्सरी नहीं होने पर लेही पद्धति से अंकुरित बीजों की बुआई ड्रम सीडर या छिटकवा विधि से करने की सलाह दी गई है।

वैज्ञानिकों ने सीधी बुआई करने वाले किसानों से 15 जुलाई तक बुआई तथा रोपाई करने वाले किसानों से 30 जुलाई तक धान की रोपाई पूरी करने का आग्रह किया है। साथ ही इन्द्रावती, छत्तीसगढ़ बारानी, इंदिरा एरोबिक, एमटीयू-1010, एमटीयू-1153, एमटीयू-1156, एमटीयू-1001, विक्रम टीसीआर, छत्तीसगढ़ धान-1919, छत्तीसगढ़ तेजस्वी और महामाया जैसी शीघ्र एवं मध्यम अवधि में पकने वाली किस्मों को अपनाने की सलाह दी गई है।

विशेषज्ञों ने बुआई से पहले बीज उपचार को आवश्यक बताते हुए प्रति किलोग्राम बीज में 2.5 ग्राम कार्बेन्डाजिम अथवा अन्य अनुशंसित कवकनाशी के उपयोग की सलाह दी है। साथ ही एजोस्पाइरिलम, पीएसबी और केएसबी जैसे जैव उर्वरकों से बीज उपचार कर रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने पर जोर दिया गया है। लगातार वर्षा वाले क्षेत्रों में लेही पद्धति अपनाने की भी सलाह दी गई है।

कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि धान की सीधी बुआई वाले खेतों में समय पर खरपतवार नियंत्रण नहीं होने पर उत्पादन में 50 प्रतिशत तक कमी आ सकती है। इसलिए बुआई के बाद पहले 40 दिनों तक खेत को खरपतवार मुक्त रखना जरूरी है। संतुलित उर्वरक प्रबंधन के तहत प्रति एकड़ अधिकतम दो बोरी यूरिया, एक बोरी डीएपी और आधी बोरी पोटाश के उपयोग की अनुशंसा की गई है। साथ ही हरी खाद और नील हरित काई के उपयोग से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने पर भी बल दिया गया है।

कृषि विभाग ने किसानों से खेती संबंधी किसी भी तकनीकी समस्या या मार्गदर्शन के लिए निकटस्थ कृषि विज्ञान केंद्र, कृषि अनुसंधान केंद्र, कृषि महाविद्यालय अथवा कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की अपील की है।

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