

रायपुर। अल-नीनो के संभावित प्रभाव को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी करते हुए सतर्क रहने की अपील की है। विभाग के अनुसार मानसून में देरी, लंबे अंतराल तक सूखे जैसी स्थिति तथा बारिश का मौसम समय से पहले समाप्त होने की आशंका खरीफ फसलों को प्रभावित कर सकती है। इससे निपटने के लिए राज्य में विशेष आकस्मिक कार्ययोजना लागू की गई है।
कृषि विभाग ने बताया कि कार्ययोजना का उद्देश्य फसल विविधीकरण को बढ़ावा देना, कम पानी वाली फसलों का रकबा बढ़ाना, जल संरक्षण और आधुनिक कृषि तकनीकों के माध्यम से सीमित संसाधनों में बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना है। किसानों को कम अवधि में तैयार होने वाली तथा कम पानी की आवश्यकता वाली धान की उन्नत किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है।
विभाग के अनुसार टिकरा एवं भर्री जैसी ऊंची और ढलान वाली भूमि में समय पर बुआई तथा नमी संरक्षण के लिए डायरेक्ट सीडेड राइस (डीएसआर) पद्धति अपनाना लाभकारी रहेगा। किसानों से केवल धान पर निर्भर रहने के बजाय अरहर, मूंग, उड़द जैसी दलहनी तथा तिल, सोयाबीन और मूंगफली जैसी तिलहनी फसलों को अपनाने की अपील की गई है।
एडवाइजरी में खेतों की नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग (भूमि आच्छादन), मजबूत मेड़बंदी तथा वर्षा जल संरक्षण के स्थानीय और पारंपरिक उपायों को अपनाने पर भी जोर दिया गया है। इससे वाष्पीकरण कम होगा और उपलब्ध नमी का बेहतर उपयोग किया जा सकेगा।
कृषि विभाग ने प्राकृतिक आपदा से होने वाले आर्थिक नुकसान से बचाव के लिए किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने की अपील की है। साथ ही खेती के दौरान किसी भी तकनीकी समस्या या मौसम संबंधी कठिनाई आने पर निकटतम कृषि विभाग के अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक मार्गदर्शन लेने की सलाह दी गई है।

