Tuesday, September 29, 2026
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सच्ची संतुष्टि और शक्ति दूसरों को नीचा दिखाने में नहीं, बल्कि स्वयं के उत्थान और सबका साथ निभाने में है निहित

मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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मानव जीवन में ‘शक्ति’ और ‘संतुष्टि’ दो ऐसे शब्द हैं, जिन्हें अक्सर गलत संदर्भों में समझ लिया जाता है। आधुनिक समाज की अंधी दौड़ में कई बार लोग दूसरों को हराने, उन्हें नीचा दिखाने या कमतर साबित करने को ही अपनी जीत और ताकत मान बैठते हैं, लेकिन वास्तव में, बैसाखियों को तोड़कर खुद को लंबा दिखाना कोई बड़प्पन नहीं है। सच्ची संतुष्टि और वास्तविक शक्ति दूसरों को गिराने में नहीं, बल्कि स्वयं के उत्थान और सबको साथ लेकर चलने में निहित है। सच्ची संतुष्टि तब मिलती है जब हम अपनी सफलता के शिखर पर अकेले नहीं खड़े होते, बल्कि दूसरों का हाथ पकड़कर उन्हें भी ऊपर खींचते हैं। “चढ़ते सूरज की रोशनी वही है, जो सबको उजाला दे, न कि वह जो दूसरों को अपनी तपिश से झुलसा दे।”
जब हम किसी गिरते हुए को संभालते हैं या किसी की उन्नति का माध्यम बनते हैं, तो जो आत्मिक सुख और सुकून मिलता है, उसकी तुलना दुनिया के किसी भी भौतिक सुख से नहीं की जा सकती। सहअस्तित्व और सहयोग की भावना ही समाज को मजबूत बनाती है। दूसरों को नीचा दिखाकर हम केवल अपने अहंकार को तृप्त कर सकते हैं, अपनी आत्मा को नहीं। वास्तविक रूप से शक्तिशाली और संतुष्ट वही व्यक्ति है जो निरंतर अपने आत्म-विकास के लिए प्रयासरत रहता है और अपनी सफलता की छांव से पूरे समाज को शीतलता प्रदान करता है। सबका साथ निभाना ही मानवता का सच्चा गौरव है और यही जीवन की सार्थकता है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

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