Tuesday, September 29, 2026
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भोरमदेव जंगल सफारी बनी छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म की नई पहचान

एक माह में 480 से अधिक पर्यटकों ने किया भ्रमण, स्थानीय युवाओं और महिला समूहों को मिला रोजगार; पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण का सफल मॉडल बनकर उभरी पहल

रायपुर, 30 जून 2026।

छत्तीसगढ़ में पर्यटन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय रोजगार को एक साथ बढ़ावा देने की दिशा में भोरमदेव जंगल सफारी एक सफल मॉडल बनकर उभरी है। राज्य सरकार की इको-टूरिज्म पहल के तहत विकसित इस जंगल सफारी ने संचालन के पहले ही महीने में प्रदेश के प्रमुख पर्यटन आकर्षण के रूप में अपनी पहचान बनाई है। प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीवों के प्रति रुचि रखने वाले पर्यटकों के बीच यह सफारी तेजी से लोकप्रिय हो रही है, वहीं स्थानीय युवाओं, महिला स्व-सहायता समूहों और वन प्रबंधन समितियों को भी प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा, उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में प्रारंभ की गई इस पहल का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ स्थानीय समुदाय को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराना है। भोरमदेव जंगल सफारी ने कम समय में ही इस उद्देश्य को साकार करने की दिशा में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

पहले ही महीने में उमड़ा पर्यटकों का उत्साह

वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि भोरमदेव जंगल सफारी का शुभारंभ 3 मई को किया गया था और 4 जून तक इसका संचालन हुआ। मानसून को देखते हुए फिलहाल सफारी का संचालन अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया है, जिसे वर्षा ऋतु के बाद नवंबर से पुनः शुरू किया जाएगा।

संचालन के केवल एक माह के दौरान 480 से अधिक पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया, जिससे लगभग पौने तीन लाख रुपये से अधिक की आय प्राप्त हुई। यह आंकड़ा दर्शाता है कि भोरमदेव जंगल सफारी कम समय में ही प्रदेश के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थलों में शामिल हो चुकी है।

स्थानीय युवाओं और महिलाओं को मिला रोजगार

जंगल सफारी के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। सफारी में वाहन चालक, गाइड और गेट कीपर के रूप में कार्यरत 17 स्थानीय युवाओं ने एक माह में 75 हजार रुपये से अधिक की आय अर्जित की।

इसके अलावा वन प्रबंधन समिति को लगभग 92 हजार रुपये तथा वन विभाग को 26 हजार रुपये से अधिक की आय हुई। सफारी परिसर में संचालित स्व-सहायता समूह की कैंटीन भी पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी रही। एक माह में कैंटीन से 20 हजार रुपये से अधिक का लाभ हुआ, जिससे महिला समूहों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिला।

प्राकृतिक उद्यान भी बना आकर्षण

जंगल सफारी के साथ भोरमदेव का प्राकृतिक उद्यान भी पर्यटकों की पसंद बनकर उभरा है। सफारी का आनंद लेने वाले पर्यटकों के अलावा 1,500 से अधिक लोगों ने उद्यान का भ्रमण किया। इससे स्पष्ट है कि भोरमदेव क्षेत्र पर्यटन के मानचित्र पर तेजी से अपनी अलग पहचान स्थापित कर रहा है।

वन्यजीवों की रोमांचक साइटिंग ने बढ़ाया आकर्षण

करीब 36 किलोमीटर लंबे जंगल सफारी मार्ग पर पर्यटकों को समृद्ध वन्यजीवन का रोमांचक अनुभव मिला। सफारी के दौरान भारतीय गौर, भालू, नीलगाय, सांभर, कोटरी (बार्किंग डियर), बाघ के पदचिह्न, जंगली मुर्गा, विभिन्न प्रजातियों के पक्षी तथा रंग-बिरंगी तितलियों का प्राकृतिक वातावरण में अवलोकन करने का अवसर मिला।

घने जंगल, ऊंची पहाड़ियां और प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर वातावरण ने पर्यटकों को यादगार अनुभव प्रदान किया, जिससे भोरमदेव जंगल सफारी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।

इको-टूरिज्म और स्थानीय विकास का सफल संगम

वन मंडलाधिकारी निखिल अग्रवाल ने बताया कि लगभग 352 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले भोरमदेव अभयारण्य में 36 किलोमीटर लंबा जंगल सफारी मार्ग विकसित किया गया है। इसका मुख्य प्रवेश द्वार भोरमदेव मंदिर के समीप करियाआमा क्षेत्र में स्थित है, जहां से पर्यटक अपनी रोमांचक जंगल यात्रा शुरू करते हैं।

भोरमदेव जंगल सफारी के माध्यम से पर्यटकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध जैव विविधता, प्राकृतिक वन संपदा और वन्यजीवों को निकट से देखने का अवसर मिल रहा है। वहीं स्थानीय समुदाय को रोजगार, आय और स्वरोजगार के नए अवसर प्राप्त हो रहे हैं। पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के संतुलित विकास का यह मॉडल भविष्य में छत्तीसगढ़ के इको-टूरिज्म को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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