Monday, July 27, 2026
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फूले नि:शुल्क पाठशाला के विद्यार्थियों ने मनाई राजर्षि शाहू महाराज की जयंती

न्यूज़ छत्तीसगढ़

फूले नि:शुल्क पाठशाला के विद्यार्थियों ने मनाई राजर्षि शाहू महाराज की जयंती

बिलासपुर

“महापुरुषों की जयंती केवल स्मरण का अवसर नहीं होती, बल्कि उनके विचारों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का माध्यम भी होती है।” इसी उद्देश्य के साथ फूले नि:शुल्क पाठशाला में सामाजिक न्याय के अग्रदूत, प्रजावत्सल शासक और आधुनिक भारत में सामाजिक परिवर्तन के महानायक राजर्षि शाहू महाराज की जयंती गरिमामय वातावरण में मनाई गई।

कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसकी तैयारी विद्यार्थियों ने पहले से ही प्रारंभ कर दी थी। कुछ दिन पूर्व ही सभी विद्यार्थियों को यह विषय दिया गया था कि वे राजर्षि शाहू महाराज के जीवन, विचारों और उनके सामाजिक कार्यों का अध्ययन करें तथा कार्यक्रम के दिन अपने विचार स्वयं प्रस्तुत करें। परिणामस्वरूप विद्यार्थियों ने पूरे उत्साह और आत्मविश्वास के साथ मंच पर आकर अपने विचार रखे और शाहू महाराज के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को अपने शब्दों में अभिव्यक्त किया।

अपने वक्तव्यों में विद्यार्थियों ने बताया कि राजर्षि शाहू महाराज ने ऐसे समय में सामाजिक परिवर्तन का बिगुल फूंका, जब समाज गहरी असमानताओं से जूझ रहा था। उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे प्रभावी साधन माना और वंचित, शोषित तथा पिछड़े वर्गों के लिए विद्यालयों, छात्रावासों और छात्रवृत्तियों की व्यवस्था की। उन्होंने प्रशासन में वंचित समाज की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए आरक्षण जैसी ऐतिहासिक पहल की, जो आगे चलकर सामाजिक न्याय की आधारशिला बनी। इसके साथ ही उन्होंने जातिगत भेदभाव, छुआछूत, बाल विवाह और सामाजिक कुरीतियों के विरुद्ध साहसिक कदम उठाए तथा स्त्री शिक्षा और समान अधिकारों का खुलकर समर्थन किया।

फूले नि:शुल्क पाठशाला का यह कार्यक्रम केवल एक औपचारिक जयंती समारोह नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास की दिशा में एक सार्थक प्रयास भी था। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को महापुरुषों के जीवन और उनके परिवर्तनकारी कार्यों से परिचित कराना, उनमें सामाजिक चेतना का विकास करना तथा उन्हें यह समझाना था कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन विचार, शिक्षा और साहस से संभव होता है।

साथ ही, इस आयोजन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य विद्यार्थियों के भीतर मंच पर बोलने का आत्मविश्वास विकसित करना भी था। जब बच्चे स्वयं अध्ययन करके अपने विचार बिना किसी झिझक के सभी के सामने रखते हैं, तो उनमें तार्किक सोच, अभिव्यक्ति की क्षमता, नेतृत्व कौशल और निर्णय लेने का आत्मविश्वास विकसित होता है। यही गुण आगे चलकर उन्हें समाज का जागरूक, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करते हैं।

फूले नि:शुल्क पाठशाला का विश्वास है कि शिक्षा केवल पुस्तकों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि वह ऐसे अवसर भी प्रदान करे, जहाँ विद्यार्थी विचार करना, प्रश्न पूछना, अपनी बात प्रभावी ढंग से रखना और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना सीखें। राजर्षि शाहू महाराज की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम इसी सोच का एक सशक्त उदाहरण रहा, जिसने विद्यार्थियों को उनके महान आदर्शों से जोड़ते हुए आत्मविश्वास और नेतृत्व की ओर एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया।

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