मूकनायक/नरेश जाटव/कैलादेवी/ करौली/राजस्थान।
करौली। नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत अंतर्राष्ट्रीय नशा निषेध दिवस के अवसर पर स्थानीय जिला कारागार में बंदियों के सुधार और पुनर्वास हेतु जिला मानसिक स्वास्थ्य इकाई द्वारा एक दिवसीय नशा मुक्ति जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य कैदियों को मानसिक व शारीरिक रूप से स्वस्थ बनाना और उन्हें नशे की लत से दूर रहने के लिए प्रेरित करना था।
शिविर में चिकित्सा विशेषज्ञों और परामर्शदाताओं ने बंदियों का मार्गदर्शन किया। नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉ. प्रेमराज मीना ने “नशा मुक्त भारत अभियान – विकसित भारत की पहचान” विषय पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नशा न केवल इंसान के शरीर और दिमाग को खोखला करता है, बल्कि हंसते-खेलते परिवार को भी बर्बाद कर देता है।
अपराध और नशे का गहरा संबंध है, इसलिए अपराध मुक्त जीवन जीने के लिए नशे की आदत को छोड़ना बेहद जरूरी है।
साइकेट्रिक नर्स गौरव गोयल ने बंदियों को नशे से होने वाली जानलेवा बीमारियों जैसे कैंसर, लीवर सिरोसिस और मानसिक तनाव के बारे में विस्तार से समझाया। वहीं, जेल उपाधीक्षक रामकिशन मीना ने योग और ध्यान के माध्यम से इच्छाशक्ति को मजबूत करने के तरीके बताए।
इसके अतिरिक्त नर्सिंग अधिकारी अंकुर पाराशर ने नशा मुक्त भारत अभियान की जानकारी देते हुए राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 14446 के बारे में अवगत कराया।
कार्यक्रम के समापन पर जेल प्रशासन की उपस्थिति में सभी बंदियों को भविष्य में कभी नशा न करने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर एक अच्छा नागरिक बनने की सामूहिक शपथ दिलाई गई।
इस अवसर पर जेल उपाधीक्षक, कारागार स्टाफ, चिकित्सा कर्मी और बड़ी संख्या में बंदी उपस्थित रहे।

