
मूकनायक समाचार | सत्यशील गोंडाने | बालाघाट
बालाघाट। मत्स्य प्रजनन एवं वंशवृद्धि संरक्षण को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने 16 जून से 15 अगस्त 2026 तक जिले में मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का आदेश जारी किया है। कलेक्टर मृणाल मीना द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस अवधि में जिले की नदियों, जलाशयों एवं अधिसूचित जल क्षेत्रों में मछली पकड़ने, परिवहन तथा क्रय-विक्रय पर रोक रहेगी।
मध्यप्रदेश नदीय मत्स्य उद्योग नियम 1972 एवं संशोधित अधिनियम 1981 के प्रावधानों के तहत प्रतिवर्ष मत्स्य प्रजनन काल के दौरान क्लोज सीजन घोषित किया जाता है। इसी क्रम में 16 जून से 15 अगस्त तक की अवधि को बंद ऋतु घोषित किया गया है।
मत्स्य विभाग के अनुसार वर्षा ऋतु अधिकांश मछलियों का प्रजनन काल होता है। इस दौरान मत्स्याखेट से मछलियों की संख्या प्रभावित होती है, जिससे जैव विविधता और मत्स्य उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ता है। इसलिए प्रजनन काल में संरक्षण के उद्देश्य से यह प्रतिबंध लगाया गया है।
सहायक संचालक मत्स्योद्योग पूजा रोडो ने बताया कि प्रतिबंध जिले की सभी अधिसूचित नदियों एवं जलाशयों में लागू रहेगा। हालांकि ऐसे छोटे तालाब और जल स्रोत, जिनका किसी नदी से प्रत्यक्ष संबंध नहीं है और जो अधिसूचित जल क्षेत्र में शामिल नहीं हैं, इस प्रतिबंध से मुक्त रहेंगे।
जिला प्रशासन ने मत्स्य सहकारी समितियों और संबंधित विभागों को आदेश का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। प्रतिबंध अवधि के दौरान निरीक्षण दल नियमित जांच करेंगे तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रजनन काल में मछलियों को संरक्षण मिलने से उनकी संख्या में वृद्धि होती है, जिससे भविष्य में मत्स्य उत्पादन बढ़ता है और मछुआरा समुदाय को दीर्घकालिक लाभ मिलता है। प्रशासन ने नागरिकों से भी मत्स्य संपदा के संरक्षण के लिए सहयोग करने की अपील की है।

