कहा गई पल-पल की निगरानी समिति
नहीं हुआ हास्पिटल पर कार्रवाई और निष्पक्ष जांच तो हाइकोर्ट जाने को तैयारी – सूत्र
मूकनायक/रिपोर्टर इंद्रसेन गौतम बस्ती/उत्तर प्रदेश
सिद्धार्थनगर–इटवा में बड़ा खुलासा: मुकदमा दर्ज के बाद अस्पताल की जिम्मेदारी और संचालन को लेकर उठे गंभीर सवाल इटवा क्षेत्र के जनता सेवा हॉस्पिटल में नवजात शिशु की मौत के मामले में पीड़ित पक्ष की तहरीर पर इटवा थाने में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच पुलिस और स्वास्थ्य विभाग द्वारा की जा रही है। जांच टीम द्वारा निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया गया है, लेकिन इसी बीच अस्पताल संचालन को लेकर नए सवाल सामने आ रहे हैं। आरोप है कि अस्पताल संचालक द्वारा यह कहा जा रहा है कि राकेश यादव का हॉस्पिटल से कोई लेना-देना नहीं है, जबकि दूसरी तरफ आरोप है कि वही व्यक्ति कई पत्रकारों, अधिकारियों और अखबारों के संपादकों तक फोन कर मामले को लेकर संपर्क कर रहा है। अब सवाल उठ रहा है कि अगर राकेश यादव का अस्पताल से कोई संबंध नहीं है तो वह लगातार मामले में सक्रिय क्यों दिखाई दे रहे हैं? मामले में यह भी मांग उठ रही है कि जांच के दौरान संबंधित लोगों के एवं राकेश यादव के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) की जांच कराई जाए, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि अस्पताल के संचालन में वास्तविक भूमिका किसकी थी और जिम्मेदारी किसकी बनती है। वहीं घटना को लेकर यह भी आरोप सामने आया है कि घटना के समय मौजूद प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार ऑपरेशन के समय डॉ. डाली शर्मा मौजूद नहीं थीं। ऐसे में जांच का विषय है कि उस समय चिकित्सकीय जिम्मेदारी किसकी थी। आरोप यह भी है कि जांच टीम के पहुंचने से पहले अस्पताल में मरम्मत कार्य दिखाकर संचालन बंद कर दिया गया और बाद में डॉ. डाली शर्मा की मौजूदगी को लेकर सवाल उठे। इसी बीच अस्पताल की अनुमति को लेकर भी बड़ा सवाल सामने आया है। विभाग के अनुसार पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड की NOC दिसंबर 2024 तक ही वैध थी, इसके बाद भी अस्पताल संचालन जारी रहने के आरोप लगाए जा रहे हैं। पूर्व में जिलाधिकारी द्वारा संयुक्त टीम गठित कर स्वास्थ्य विभाग, पुलिस विभाग और मजिस्ट्रेट के साथ समय-समय पर रूटीन जांच और औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए थे। अब सवाल यह है आखिर बिना वैध NOC के अस्पताल कैसे चलता रहा? क्या निगरानी व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित रह गई? अस्पताल का वास्तविक संचालक कौन है, इसकी जांच कब होगी फिलहाल पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

