Tuesday, September 29, 2026
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बालाघाट बनेगा प्रदेश का पहला ‘आदर्श बांस जिला’, बांस आधारित रोजगार और उद्योगों को मिलेगा नया विस्तार

मूकनायक समाचार/सत्यशील गोंडाने
बालाघाट

बालाघाट। जिले को बांस उत्पादन, प्रसंस्करण एवं बांस आधारित उद्योगों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल शुरू कर दी है। इसी उद्देश्य से शनिवार को कलेक्टर मृणाल मीना की अध्यक्षता में बालाघाट बांस विकास प्राधिकरण के गठन एवं जिले में बांस आधारित रोजगार, उद्यमिता और उद्योगों को बढ़ावा देने के संबंध में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में विभिन्न विभागों के अधिकारियों, विशेषज्ञों एवं भारतीय वन सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी डॉ. ए.के. भट्टाचार्य ने भाग लेकर बांस क्षेत्र के विकास की संभावनाओं और कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की।

कलेक्टर मृणाल मीना ने कहा कि बालाघाट जिले में बांस आधारित उद्योगों और स्वरोजगार की अपार संभावनाएं हैं। स्थानीय कारीगरों, युवाओं एवं ग्रामीण परिवारों को बांस आधारित गतिविधियों से जोड़कर उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना एवं पीएमएफएमई योजना के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को प्रशिक्षण, ऋण एवं अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए जिला प्रशासन विशेष प्रयास करेगा।

बैठक में बालाघाट को “आदर्श बांस जिला” घोषित करने के प्रस्ताव पर भी गंभीर चर्चा हुई। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के कुल बांस क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत तथा कुल बांस उत्पादन का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा अकेले बालाघाट जिले में है। जिले के आदिवासी एवं बैगा समुदाय की आजीविका का प्रमुख आधार बांस है, इसलिए इस क्षेत्र के विकास से हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सकेगी।

डॉ. ए.के. भट्टाचार्य ने बांस के आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरणीय महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बांस विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली वनस्पतियों में से एक है तथा इसका शत-प्रतिशत उपयोग संभव है। उन्होंने कहा कि बांस से फर्नीचर, हस्तशिल्प, ज्वेलरी, कृषि उपकरण, खिलौने, अगरबत्ती, आवास निर्माण सामग्री सहित अनेक उत्पाद तैयार किए जाते हैं। उन्होंने बांस को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए उच्च गुणवत्ता वाली प्रजातियों के रोपण पर जोर दिया।

बैठक में यह भी बताया गया कि बांस पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह अधिक मात्रा में ऑक्सीजन प्रदान करने के साथ कार्बन अवशोषण की क्षमता भी रखता है, जिससे पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

दक्षिण वन मंडलाधिकारी नित्यानंदम एल ने जानकारी दी कि वन विभाग कृषि वानिकी के अंतर्गत किसानों को बांस के पौधे उपलब्ध करा रहा है। साथ ही बांस रोपण को प्रोत्साहित करने के लिए दो वर्षों में प्रति पौधा 150 रुपये तक का अनुदान भी दिया जा रहा है।

बैठक में किसानों द्वारा उत्पादित बांस की सीधी खरीदी, विपणन सुविधाओं के विस्तार, मूल्य संवर्धन और स्थानीय स्तर पर उद्योग स्थापना के विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने कहा कि जिले में उपलब्ध प्रचुर बांस संसाधन का स्थानीय स्तर पर उपयोग कर युवाओं और कारीगरों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते हैं।

बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि बांस आधारित उत्पाद निर्माण, प्रशिक्षण, विपणन व्यवस्था और उद्योग स्थापना के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वित रूप से कार्य करेंगे, ताकि बालाघाट जिले को बांस उद्योग के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जा सके।

बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिषेक सराफ, जिला व्यापार एवं उद्योग केन्द्र की महाप्रबंधक प्रीति मर्सकोले, उप संचालक कृषि फूलसिंह मालवीय, सहायक उद्यान अधिकारी क्षितिज कराड़े तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

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