Thursday, June 11, 2026
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सपहा पंचायत से उठी आवाज: अनिश्चितकालीन हड़ताल 124वें दिन भी जारी, ग्रामीणों ने उठाए मूलभूत सुविधाओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर मुद्दे

सपहा पंचायत से उठी आवाज: अनिश्चितकालीन हड़ताल 124वें दिन भी जारी, ग्रामीणों ने उठाए मूलभूत सुविधाओं और प्रशासनिक लापरवाही के गंभीर मुद्दे

मूकनायक

सूरजपुर/सरगुजा,

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग अंतर्गत ग्राम पंचायत सपहा से शुरू हुआ ग्रामीणों का आंदोलन आज 124वें दिन भी जारी है। यह अनिश्चितकालीन हड़ताल 21 अप्रैल 2026 से पुनः प्रारंभ की गई, जिसे स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार छत्तीसगढ़ इकाई के प्रदेश अध्यक्ष लाल जी बौद्ध के नेतृत्व में संचालित किया जा रहा है।
आंदोलन का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त मूलभूत समस्याओं—विशेषकर शुद्ध पेयजल संकट, सड़क निर्माण, वन अधिकार पट्टा, आवास योजना, तथा अवैध रेत परिवहन—की ओर शासन-प्रशासन का ध्यान आकर्षित करना है।
सुशासन तिहार में भी नहीं हुआ समाधान
ग्रामीणों का आरोप है कि 22 अप्रैल से 29 अप्रैल 2026 तक “सुशासन तिहार 2026” के अंतर्गत पंचायत स्तर पर कई आवेदन प्रस्तुत किए गए, लेकिन अब तक किसी भी मांग पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इससे नाराज होकर ग्रामीणों ने आंदोलन को और तेज कर दिया है।
अवैध रेत परिवहन पर बड़ा खुलासा
आंदोलन के दौरान 2 मई 2026 को एक ट्रैक्टर चालक द्वारा वीडियो के माध्यम से अवैध रेत परिवहन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए। आरोप है कि बाहरी ट्रैक्टरों को संरक्षण दिया जाता है जबकि स्थानीय ग्रामीणों के ट्रैक्टरों पर कार्रवाई की जाती है। इससे प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
प्रमुख मांगें
आंदोलनकारियों ने अपनी मांगों में निम्न बिंदुओं को प्रमुखता दी है:
विभिन्न मोहल्लों में शुद्ध पेयजल की व्यवस्था (हैंडपंप/बोर खनन)
ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं मरम्मत
वन अधिकार पट्टा वितरण
सीसी रोड, पुलिया एवं नाली निर्माण
स्ट्रीट लाइट स्थापना
अवैध रेत परिवहन पर पूर्ण रोक और क्षतिपूर्ति
आवास योजना में पात्र हितग्राहियों को लाभ
बौद्ध समाज के लिए श्मशान भूमि एवं सामुदायिक भवन आवंटन
प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार आवेदन, ज्ञापन और स्मरण पत्र देने के बावजूद अधिकारियों द्वारा कार्रवाई नहीं की जा रही। यहां तक कि कोर्ट से संबंधित मामलों में भी रिपोर्ट लंबित होने के आरोप लगाए गए हैं।
आंदोलन का नया स्वरूप
यह आंदोलन अब केवल धरना स्थल तक सीमित नहीं है। ग्रामीण अपने-अपने क्षेत्रों से फोटो, वीडियो और लिखित शिकायतों के माध्यम से जुड़ रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए भी विरोध दर्ज कराया जा रहा है।
सुरक्षा की मांग
आंदोलन के नेतृत्वकर्ता ने खुद और अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। उनका आरोप है कि रेत माफिया एवं अन्य तत्वों से उन्हें जान का खतरा है, बावजूद इसके अब तक सुरक्षा उपलब्ध नहीं कराई गई है।
शांतिपूर्ण आंदोलन जारी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा, लेकिन जब तक सभी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, तब तक इसे जारी रखा जाएगा।
यह आंदोलन अब एक पंचायत से निकलकर पूरे छत्तीसगढ़ के पीड़ित, शोषित और वंचित वर्ग की आवाज बनने की दिशा में बढ़ता दिखाई दे रहा है।

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