मूकनायक/राष्ट्रीय प्रभारी ओमप्रकाश वर्मा
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पुरानी कहावत है कि “पैसा हाथ का मैल है,” लेकिन आधुनिक युग का यथार्थ इसके ठीक विपरीत है। आज के दौर में दौलत केवल कागजी नोटों का ढे़र नहीं, बल्कि एक गरिमापूर्ण जीवन जीने की अनिवार्य शक्ति है। यह वह धुरी है जिस पर व्यक्ति की बुनियादी जरूरतें, सामाजिक सम्मान और भविष्य की सुरक्षा का पहिया घूमता है। इंसान की प्राथमिक आवश्यकताएं—रोटी, कपड़ा और मकान—पूरी तरह से आर्थिक सामर्थ्य पर टिकी हैं। अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं और एक सुखद जीवन स्तर बिना धन के मात्र एक कल्पना बनकर रह जाते हैं। समाज में सम्मान और ‘व्यक्ति की हैसियत’ अक्सर उसकी आर्थिक स्वतंत्रता से मापी जाती है। जब आप आर्थिक रूप से समृद्ध होते हैं, तो आपको दूसरों के सामने झुकना नहीं पड़ता। यह आत्मनिर्भरता आपके आत्म-सम्मान को मजबूती देती है।
दौलत व्यक्ति को समाज में एक ‘आवाज’ देती है। एक समृद्ध व्यक्ति ना केवल अपना विकास करता है, बल्कि परोपकार के माध्यम से दूसरों की मदद करके वास्तविक प्रतिष्ठा अर्जित करता है। अचानक आई बीमारी, व्यापार में घाटा या कोई भी पारिवारिक संकट हो, धन उस समय ढ़ाल बनकर खड़ा होता है। जिसके पास पर्याप्त संचित धन है, वह भविष्य की चिंताओं से मुक्त होकर वर्तमान का आनंद ले सकता है। दौलत जीवन में सब कुछ तो नहीं है, लेकिन वह ‘बहुत कुछ’ है जिसके बिना जीवन का संघर्ष अत्यंत कठिन हो जाता है। यह व्यक्ति को स्वतंत्रता, सुरक्षा और सम्मान प्रदान करती है। हालांकि, धन का अर्जन ईमानदारी से और उसका उपयोग विवेक से होना चाहिए क्योंकि सही तरीके से कमाई गई दौलत ही जीवन का असली आधार बनती है।
बिरदी चंद गोठवाल
प्रदेश प्रभारी मूकनायक, हरियाणा

